Tuesday, 27 June 2017

आयुर्वेद से इलाज दोस्तो बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी लाया हू जरूर पड़े ओर आगे बढ़ाए


विधिः सुबह खाली पेट भूमि पर चटाई,
कम्बल इत्यादि विद्युत की कुचालक बिछायत
बिछा के पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके
श्वासन में लेट जायें। पूरा श्वास बाहर फेंक दें व पेट को
अंदर-बाहर (बाहर कम, अंदर ज्यादा) 20-25 बार करें।
ऐसा 3 बार श्वास छोड़ कर करने से 60-70 बार पेट
की क्रिया हो जायेगी। श्वास
बाहर निकाल के 30-40 बार गुदाद्वार का आकुंचन-प्रसरण
करें, जैसे घोड़ा लीद छोड़ते समय करता है।
इस प्रक्रिया को 4-5 बार दुहराना है, जिससे आकुंचन-
प्रसरण 150 से 200 बार हो जायेगा। इसे ʹ स्थल बस्ति ʹ
कहते हैं।
                                                              
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पुदीना
विधिः सुबह खाली पेट भूमि पर चटाई,
कम्बल इत्यादि विद्युत की कुचालक बिछायत
बिछा के पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके
श्वासन में लेट जायें। पूरा श्वास बाहर फेंक दें व पेट को
अंदर-बाहर (बाहर कम, अंदर ज्यादा) 20-25 बार करें।
ऐसा 3 बार श्वास छोड़ कर करने से 60-70 बार पेट
की क्रिया हो जायेगी। श्वास
बाहर निकाल के 30-40 बार गुदाद्वार का आकुंचन-प्रसरण
करें, जैसे घोड़ा लीद छोड़ते समय करता है।
इस प्रक्रिया को 4-5 बार दुहराना है, जिससे आकुंचन-
प्रसरण 150 से 200 बार हो जायेगा। इसे ʹ स्थल बस्ति ʹ
कहते हैं।
                                                              
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पुदीना -
गर्मी में पुदीना खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। ये एक बहुत अच्छी औषधि भी है साथ ही इसका सबसे बड़ा गुण यह है कि पुदीने का पौधा कहीं भी किसी भी जमीन, यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पडती है।
थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिए पर्याप्त है। पुदीना को किसी भी समय उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर प्रयोग में लाया जा सकता है।
- हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर बाद चेहरा ठंडे पानी से धो लें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरा निखर जाएगा।
-अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और -आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।
- पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे।
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त्वचा रोग होने पर यह करें
त्वचा संबंधी रोग केतु के दुष्प्रभाव से बढ़ते हैं। यदि त्वचा संबंधी घाव ठीक न हो रहा हो तो सायंकाल मिट्टी के नए पात्र में पानी रखकर उसमें सोने की अंगूठी या एनी कोइ आभूषण दाल दें। कुछ देर बाद उसी पानी से घाव को धोने के बाद अंगूठी निकालकर रख लें तथा पाने किसी चौराहे पर फेंक आएं। ऐसा तीन दिन करें तो रोग शीघ्र ठीक हो जाएगा।
Krantikari sant pu.shree parasmuni m.s.
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आइये जाने छिलका क्या -क्या करता है.......
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* खरबूजे को छिलका समेत खाने से कब्ज दूर होती है।
* खीरे के छिलके से भी कीट और झींगुर भागते हैं।
* पपीते के छिलके सौंदर्यवर्धक माने जाते हैं। त्वचा पर लगाने से खुश्की दूर होती है। एड़ियों पर लगाने से वे मुलायम होती हैं।
* चोट लगने पर केले के छिलके को रगड़ने से रक्तस्राव रुक जाता है।
* कच्चे केले के छिलकों से चटपटी सब्जी बनती है।
* मटर के मुलायम छिलकों की भी स्वादिष्ट सब्जी बनती है।
* टमाटर और चुकंदर के छिलकों को चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है और होठों की लालिमा बढ़ती है।
* करेला जितना गुणकारी होता है उसके छिलके भी उतने फायदेमंद होते हैं। अलमारी में रखने से कीट भागते हैं।
* तोरी और घीया के छिलके की सब्जी भी पेट रोगों में फायदा पहुँचाती है।
अनार का छिलका :-
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* जिन महिलाओं को अधिक मासिक स्राव होता है वे अनार के सूखे छिलके को पीसकर एक चम्मच पानी के साथ लें। इससे रक्त स्राव कम होगा और राहत मिलेगी।
* जिन्हें बवासीर की शिकायत है वे अनार के छिलके का 4 भाग रसौत और 8 भाग गुड़ को कुटकर छान लें और बारीक-बारीक गोलियां बनाकर कुछ दिन तक सेवन करें। बवासीर से जल्दी आराम मिलेगा।
* अनार के छिलके को मुंह में रखकर चूसने से खांसी का वेग शांत होता है।
* अनार को बारीक पीसकर उसमें दही मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाकर सिर पर मलें। इससे बाल मुलायम होते हैं।
काजू का छिलका :-
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* काजू के छिलके से तेल निकालकर पैर के तलवे और फटे हुए स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।
बादाम का छिलका :-
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* बादाम के छिलके व बबुल की फल्लियों के छिलके व बीज को जलाकर पीसकर थोड़ा नमक डालकर मंजन करें। इससे दांतों के कष्ट दूर होते हैं, मसूढ़ें स्वस्थ एवं दांत मजबूत बनता है।
नारियल का छिलका :-
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* नारियल का छिलका जलाकर महीन पीसकर दांतों पर घिसने से दांतें साफ होते हैं।
नारंगी का छिलका :-
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* दूध में नारंगी का छिलका छानकर दूध के साथ नियमित सेवन करने से खून साफ होता हैं।
पपीते का छिलका :-
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* पपीते के छिलके को धूप में सूखाकर, खूब बारीक पीसकर ग्लिसरीन के साथ मिलाकर लेप बनावें व चेहरे पर लगाये, मुंह की खुश्की दूर होती है।
लौकी का छिलका :-
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* लौकी के छिलके को बारीक पीसकर पानी के साथ पीने से दस्त में लाभ होता है।
तोरई का छिलका :-
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* तोरई का ताजा छिलका त्वचा पर रगड़ने से त्वचा साफ होती है।
इलायची का छिलका :_
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* इलायची के छिलके चाय की पत्तियां या शक्कर में डाल दें तो चाय स्वादिष्ट बनेगी।
संतरे का छिलका :_
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* संतरे के छिलके को दूध में पीसकर छान लें। इसे कच्चे दूध व हल्दी में मिलाकर चेहरे पर लगाये। इससे जहां चेहरे के दुश्मन मुहांसों-धब्बों का नाश होता है, वहीं त्वचा जमक उठता है।
तरबूज का छिलका :-
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* दाद, एकजीमा की शिकायत होने पर तरबूज के छिलकों को सूखाकर, जलाकर राख बना लें। तत्पश्चात् उस राख को कड़ुवे तेल में मिलाकर लगाये।
नींबू का छिलका :_
==========
* नींबू का छिलका दांत पर मलने से दांत चमकदार बनता है और मसूढ़ें भी मजबूत बनता है।
* नींबू का छिलका जूते पर रगड़े व कुछ देर के लिए धूप में रख दें। फिर जूतों पर मालिश करें। जूतों में चमक आ जायेगी।
* नींबू व संतरा के छिलकों को सूखाकर, खूब महीन चूर्ण बनाकर दांत पर घिसें। दांत चमकदार बनते हैं।
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मधुमेह अपनाएं यह घरेलू उपचार-
1.मेथी- मधुमेह को ट्रीट करने में मेथी बहुत बडा रोज प्‍ले करती है। अगर आप रोज़ 50 ग्राम मेथी नियमित रुप से खाएगें तो निश्‍चित ही आपका ग्‍लूकोज़ लेवल नीचे चला जाएगा और आपको इस बीमारी से राहत मिल जाएगी।
2.करेला- डायबिटीज के निदानों में यह भी एक महत्‍वपूर्ण खोजों में से एक है। करेले का प्रयोग एक प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में किया जाता है क्‍योंकि इसमें कैरेटिन नामक रसायन होता है जिसके दा्रा खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।
3.जामुन- इस फल का रस, पत्‍ती और बीज मधुमेह की बीमारी को जड़ से खतम कर देते हैं। जामुन के सूखे बीजों को पाउडर बना कर एक चम्‍मच दिन में दो बार पानी या दूध के साथ लेने से राहत मिलती है। इससे अग्न्याशय पर काफी अच्‍छा असर पड़ता है।
4.आमला- अगर एक चम्‍मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पिएगें तो मधुमेह की इस्‍से अच्‍छी दवा और कोई नहीं होगी।
5.आम की पत्‍ती- 15 ग्राम ताजे आम के पत्‍तों को 250 एमएल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्‍तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी लाभ होता है।
6.शहद- कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्‍यूट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है उन्‍हें चीनी की जगहं पर शहद खाने को कहा जाता है।
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टमाटर के फायदे .....
1. भोजन करने से पहले दो या तीन पके टमाटरों को काटकर उसमें पिसी हुई कालीमिर्च, सेंधा नमक एवं हरा धनिया मिलाकर खाएं। इससे चेहरे पर लाली आती है व पौरूष शक्ति बढ़ती है। पेट में कीड़े होने पर सुबह खाली पेट टमाटर में पिसी हुई कालीमिर्च लगाकर खाने से लाभ होता है।डाइबिटीज व दिल के रोगों में भी टमाटर बहुत उपयोगी होता है। प्रात: बिना कुल्ला किए पका टमाटर खाना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है। टमाटर खाने वालों को कैन्सर रोग नहीं होता।
2. दमा रोगियों को चाहिए कि वे पूरे वर्ष टमाटर उपलब्ध रखें। इसके नियमित सेवन से श्वासनली शोथ कम होता है। प्राकृतिक चिकित्सकों का कहना है कि टमाटर खाने से अतिसंकुचन भी दूर होता है और खाँसी तथा बलगम से भी राहत मिलती है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
3. टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है।टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर होते हैं और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनसे आपके वजन में जरा भी वृद्धि नहीं होगी। इसके अलावा यह पूरे शरीर के छोटे-मोटे विकारों को दूर करता है।
5. टमाटर के गूदे में दूध व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर चमक आती है। टमाटर झुर्रियों को कम करता है और रोम छिद्रों को बड़ा करता है। इसके लिए टमाटर और शहद के मिश्रण वाला फेस पैक इस्तेमाल करें। टमाटर के छिलके और बीज को निकाल दें। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है।
6. टमाटर में विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता है, यह आँखों के लिए बहुत लाभकारी है। टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है। इसके लगातार सेवन से जिगर बेहतर ढंग से काम करता है और गैस की शिकायत भी दूर होती है।जो लोग अपना वजन कम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए टमाटर एक वरदान है। एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे पतला होने के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
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थायराईड रोगों का प्राकृतिक और घरेलू पदार्थों से उपचार:-
१) थायराईड रोगों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस (नारियल पानी, पत्तागोभी, अनानास, संतरा, सेब, गाजर, चकुन्दर, तथा अंगूर का रस) पीना चाहिए तथा इसके बाद 3 दिन तक फल तथा तिल को दूध में डालकर पीना चाहिए। इसके बाद रोगी को सामान्य भोजन करना चाहिए जिसमें हरी सब्जियां, फल तथा सलाद और अंकुरित दाल अधिक मात्रा में हो। इस प्रकार से कुछ दिनों तक उपचार करने से रोग ठीक हो जाता है।
२) इस रोग से पीड़ित रोगी को कम से कम एक वर्ष तक फल, सलाद, तथा अंकुरित भोजन का सेवन करना चाहिए।
३) सिंघाड़ा, मखाना तथा कमलगट्टे का सेवन करना भी लाभदायक होता है।
थायराइड रोगों से पीड़ित रोगी को तली-भुनी चीजें, मैदा, चीनी, चाय, कॉफी, शराब, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
एक कप पालक के रस में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर फिर चुटकी भर जीरे का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात के समय में सोने से पहले सेवन करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है।
इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को उन चीजों का भोजन में अधिक प्रयोग करना चाहिए जिसमें आयोडीन की अधिक मात्रा हो।
एक गिलास पानी में 2 चम्मच साबुत धनिये को रात के समय में भिगोकर रख दें तथा सुबह के समय में इसे मसलकर उबाल लें। फिर जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो खाली पेट इसे पी लें तथा गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है ।
इस रोग से पीड़ित रोगी को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए ताकि थकावट न आ सकें और रोगी व्यक्ति को पूरी नींद लेनी चाहिए। मानसिक, शारीरिक परेशानी तथा भावनात्मक तनाव यदि रोगी व्यक्ति को है तो उसे दूर करना चाहिए ।
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★★★★★★★★★★★
भिंडी के गुणों के बारे में जानते हैं :-
1. मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद
भिंडी में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित होता है। भिंडी खून में पहले से मौजूद शुगर के अंश को सोख लेती है और ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाने में मदद करती है। मैक्स की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. सुनिता रॉय चौधरी के मुताबिक शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने में भी भिंडी मददगार होती है। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है या फिर आप शुगर की आशंका से दूर रहते हैं।
2. पेट के लिए वरदान
भिंडी हमारी आंतों के लिए फिल्टर का काम करती है। यह पेट के पित्त, अम्ल और कोलेस्ट्रॉल को बांध देती है, जिससे आंत को नुकसान नहीं पहुंचता। भिंडी आंतों की खराश को भी दूर करती है। इसलिए पेचिश या गैस की समस्या में भी भिंडी काम आती है। भिंडी शरीर में एसिड को भी बेअसर बनाती है और पाचनतंत्र के कवच के रूप में सुरक्षा करती है।
3. प्रोबायोटिक्स बनाती है
भिंडी हमारे शरीर में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया को मजबूत करती है। इसके साथ-साथ भिंडी शरीर में प्रोबायोटिक्स के विकास में भी मदद करती है, जिससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और पाचन तंत्र बेहतर होता है।
4. मूत्र की जलन समाप्त करती है
भिंडी पेशाब की जलन को दूर करती है। इसे खाने से पेशाब खुलकर और साफ आता है। इसलिए पेशाब की जलन होने पर भिंडी का सेवन करना चाहिए।
5. कमजोरी या थकावट में भी कारगर
कमजोरी, थकावट महसूस करने वालों के लिए भिंडी ऊर्जावर्धक दवा की तरह काम करती है। डॉक्टरों के मुताबिक भिंडी डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होती है।
6. जोड़ों का दर्द होता है कम
भिंडी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ हमारी हड्डियों के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा भिंडी में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के लिए लाभकारी होता है। यह जोडमें को लचीला बनाती है।
7. अस्थमा के रोगियों के लिए लाभकारी
भिंडी अस्थमा के रोगियों के लिए भी काफी लाभकारी साबित होती है। भिंडी में पाया जाने वाला विटामिन सी अस्थमा के लक्षण को पनपने से रोकता है। इसके अलावा भिंडी फेफडमें में सूजन और गले में खराश को ठीक करती है।
8. आंखें कमजोर हैं तो जरूर खाएं
भिंडी में विटामिन ‘ए’ की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो आंखों के लिए उपयोगी होता है। डॉ. चौधरी के मुताबिक जिन लोगों की आंखें कमजोर होती हैं, उन्हें भिंडी खाने की सलाह दी जाती है। खाने में यदि भिंडी शामिल कर लिया जाए तो आंखों की रोशनी तो दुरुस्त होगी ही, आंखों से संबंधित कई अन्य समस्याएं भी ठीक होती हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक भिंडी मोतियाबिंद के जोखिम को भी कम करती है, हालांकि भारत में अभी इस पर शोध जारी है।
9. खूबसूरत होता है चेहरा
भिंडी में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इस लिहाज से यह हमारी त्वचा के लिए भी वरदान है। त्वचा को पिंपल फ्री बनाना हो या चेहरे को चिकना और चमकदार बनाना हो, भिंडी हमेशा असरदार साबित होती है।
10. बालों की कंडीशनिंग
बेजान और रूखे बालों में बाउंस लाने के लिए भी आप भिंडी का इस्तेमाल कर सकते हैं। भिंडी को तब तक उबालें, जब तक कि वह एकदम पतली न हो जाए। फिर उस पानी में नींबू निचोड़कर बालों में लगाएं। इससे बालों की अच्छी कंडीशनिंग होगी और बालों में जान लौट आएगी।
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पथरी की समस्या से छुटकारा :-
1 सेब का सिरका-  यह एक ऐसा उपाय है, जो आपको स्टोन के दर्द से भी तुरंत निजात दिलाता है। प्रतिदिन सेब के सिरके का प्रयोग करने से इसमें पाया जाने वाला मेलिक ऐसिड धीरे-धीरे स्टोन को गला देता है।
2  नींबू और जैतून का तेल- नींबू के रस में बराबर मात्रा में जैतून का तेल मिलाकर, दिन में दो या तीन बार लेने से पथरी में लाभ होता है। नींबू में मौजूद साइट्रि‍क एसिड पथरी को गलाने में मदद करता है।
3  गेहूं के जवारे –  गेहूं के जवारों को पानी में उबालकर, उस पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना पथरी की समस्या में बेहद लाभदायक उपाय है।
4 पुदीना – पथरी में पुदीने का सेवन बहुत अच्छा होता है। इसमें उपस्थित टेरपेन पथरी को गलाने में सहायक होता है। पुदीने का रस या पुदीने की चाय पीने से लाभ मिलता है।यह पित्त प्रवाह को बेहतर कर, पाचक रसों को उत्तेजित करता है।
5  ईसबगोल –   सोने से पहले ईसबगोल का पानी के साथ सेवन पि‍त्त की पथरी को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
6 सलाद –  पथरी की समस्या होने पर सलाद का भरपूर सेवन करना बेहद लाभदायक होता है। इसमें खास तौर से गाजर, खीरा और चुकंदर का प्रयोग काफी अच्छा होता है। शिमला मिर्च खाने से भी पथरी में लाभ होता है।
7  साबुत अनाज –  पथरी होने पर साबुत भीगे हुए अनाज खाने पर कफी फायदा मिलता है। मूंग, चना, सेब आदि रात को भिगो कर रख दें, और सुबह अंकुरित होने पर खाएं। यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद है।
8  नाशपाती व अनार – नाशपाती का सेवन पथरी में बेहद कारगर है। इसमें पेक्टिन पाया जाता है, जो पथरी को गलाने में मदद करता है। इसके अलावा अनार के एस्ट्रिजेंट गुण पथरी को गलाने में सहायक है।
9  तरबूज – तरबूज में भरपूर मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है, जो यूरिन में एसिड के स्तर को नियंत्रित करता है। यह पथरी में काफी फायदेमंद साबित होता है। इसमें पानी की मात्रा में अधिक होती है, जो पथरी को शरीर से बाहर करने में सहायक है।
10  राजमा – राजमा का आकार किडनी जैसा होता है, इसलिए इसे किडनी बीन्स भी कहा जाता है। यह किडनी और ब्लेडर संबंधी सभी समस्याओं में कारगर होता है। किडनी की पथरी में  भि‍गोए हुए राजमा का पानी पीने से भी लाभ मिलता है।
11  नींबूपानी – नींबू के रस में सेंधा नमकर मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीने से हर तरह की पथरी गलकर, शरीर से बाहर निकल जाती है।
12  यह न खाएं – पथरी होने पर कैल्शियम अधिक मात्रा में लेने से बचें। पालक, टमाटर और दूध से बनी चीजों को खाने से बचना चाहिए।
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पेट की गैस को ठीक करने के उपाय
मानसिक तनाव, अशांति, भय, चिंता, क्रोध के कारण पाचन अंगों के आवश्यक पाचक रसों का स्राव कम हो जाता है, जिससे अज्रीर्ण(Indigestion) की तकलीफ हो जाती है और अज्रीर्ण का विकृत रूप गैस कि बिमारी पैदा कर देता है।
भोजन मेंमूंग, चना, मटर, अरहर, आलू, सेम, चावल, तथा तेज मिर्च मसाले युक्त आहारअधिक मात्रा में सेवन न करें! शीर्घ पचने वाले आहार जैसे सब्जियां, खिचड़ी, चोकर सहित बनी आटें कि रोटी, दूध, तोरई, कद्दू, पालक, टिंडा, शलजम, अदरक, आवंला, नींबू आदि का सेवन अधिक करना चाहिए।
भोजन खूब चबाचबा कर आराम से करना चाहिए! बीच बीच में अधिक पानी ना पिएं! भोजन के दोघंटे के बाद 1 से 2 गिलास पानी पिएं। दोनों समय के भोजन के बीच हल्कानाश्ता फल आदि अवश्य खाएं।
तेल गरिष्ठ भोजन से परहेज करें! भोजन सादा, सात्त्विक और प्राक्रतिक अवस्था में सेवन करने कि कोशिश करें।
दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी का सेवन अवश्य करें।
प्रतिदिन कोई नकोई व्यायाम करने कि आदत जरुर बनाएं! शाम को घूमने जाएं! पेट के आसनसे व्यायाम का पूरा लाभ मिलता है। प्राणयाम करने से भी पेट की गैस की तकलीफदूर हो जाती है।
शराब, चाय, कॉफी, तम्बाकू, गुटखा, जैसे व्यसन से बचें।
प्राक्रतिक वेगों को रोके रखने कि आदत को छोड़ें जैसे मूत्र या मल।
दिन में सोना छोड़ दें और रात को मानसिक परिश्रम से बचें|
एक चम्मच अजवाइन के साथ चुटकी भर काला नमक भोजन के बाद चबाकर खाने से पेट कि गैस शीर्घ ही निकल जाती है|
अदरकऔर नींबू का रस एक एक चम्मच कि मात्रा में लेकर थोड़ा सा नमक मिलकर भोजनके बाद दोनों समय सेवन करने से गैस कि सारी तकलीफें दूर हो जाती हैं , औरभोजन भो हजम हो जाता है!
भोजन करते समय बीच बीच में लहसुन, हिंग, थोड़ी थोड़ी मात्रा में खाते रहने से गैस कि तकलीफ नहीं होती|
हरड, सोंठ काचूर्ण आधा आधा चम्मच कि मात्रा में लेकर उसमे थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकरभोजन के बाद पानी से सेवन करने से पाचन ठीक प्रकार से होता है और गैस नहींबनती!
नींबू का रस लेने से गैस कि तकलीफ नहीं होती और पाचन क्रिया सुधरती है....
Krantikari sant pu.shree parasmuni m.s.
★★★★★★★★★★★★★
रोगों से मुक्ति दिलाते हैं ये टोटके
कुछ रोग असाध्य होते हैं तो कुछ सामान्य। कुछ रोगों में बहुत उपचार करवाने के बाद भी कुछ रोगों में कोई लाभ नहीं होता। ऐसे समय में व्यक्ति जीवन से हताश हो जाता है। यह किसी ग्रह के बुरे प्रभाव के कारण या फिर बुरी नजर लगने के कारण भी हो सकता है। नीचे साधारण रोगों के निवारण के लिए कुछ उपाय लिखे हैं। इनके करने से रोगी व्यक्ति को आराम मिलता है।
उपाय
1- लाल चंदन की माला से सूर्यदेव के मंत्र का जप प्रतिदिन 108 बार करें। इससे चर्म रोग में राहत मिलती है।
मंत्र- ऊँ ह्रीं घृणीं सूर्य आदित्याय नम:
2- किसी को मिरगी का रोग हो तो सूर्य यंत्र का निर्माण करके उसे धारण करने तथा नियमित सूर्य मंत्र का जप करने से लाभ होता है।
3- जायफल में सुराख करके लाल धागे से गले में धारण करने से मिरगी रोग में फायदा मिलता है।
4- लकवा रोग से मुक्ति के लिए मंगल यंत्र के सामने मंगल मंत्र का जप करें तथा 43 दिनों तक लगातार तांबे का एक चौकोर टुकड़ा लकवे से ग्रस्त अंग से स्पर्श कहाकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें। इससे लकवा रोगी ठीक हो जाता है।
5- आधासीसी दर्द से छुटकारा पाने के लिए विधि-विधानपूर्वक बुध यंत्र के सामने बुध मंत्र का जप जप करें। साथ ही बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाएं। इस प्रयोग से शीघ्र लाभ होता है।
6- गुरु यंत्र के नियमित दर्शन से थॉइराइड रोग में आराम मिलता है।
7- बवासीर रोग से मुक्ति पाने के लिए गुरु यंत्र के सामने गुरु मंत्र का जप करें तथा एक सफेद कागज पर अष्टगंध द्वारा गुरु यंत्र बनाकर नाभि पर बांधने से इस रोग में आराम मिलता है।
Krantikari sant pu.shree parasmuni m.s.
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अनमोल कैल्शियम बनाएँ मजबूत हड्डियाँ
प्रत्येक युवक की यह तमन्ना होती है कि उसकी भुजाएँ बलिष्ठ हों और चेहरे से ज्यादा आकर्षण पूरे शरीर में दिखे। इसके लिए वे तरह-तरह के व्यायाम करते हैं और अत्याधुनिक मशीनी सुविधाओं से सज्जित जिम में भी जाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि मजबूत भुजाएँ और बलिष्ठ शरीर के लिए कैल्शियम का कितना महत्व है?
आइए देखते हैं हमारे भोजन मे यह किस तरह से मिलता है और शरीर को मजबूती प्रदान करता है। इसके महत्व को आमतौर पर सभी माताएँ जानती हैं। बच्चों को दिन में दो-तीन बार जबरन दूध पिलाने वाली आज की माताएँ जानती हैं कि कैल्शियम उसकी बढ़ती हड्डियों के लिए कितना जरूरी है। वहीं पुराने समय की या कम पढ़ी-लिखी ग्रामीण माताएँ भी इतना तो अवश्य जानती थीं कि दूध पीने से बच्चे का डील-डौल व कद बढ़ता है। यह बच्चे को चुस्त व बलिष्ठ भी बनाता है। भले ही उन्हें दूध में पाए जाने वाले अनमोल कैल्शियम का ज्ञान न हो, जो बच्चों की हड्डियों, दाँतों के स्वरूप, उनके आकार व उन्हें स्वस्थ व मजबूत बनाने में अति सहायक सिद्ध हुआ है। इसी कैल्शियम की निरंतर कमी के कारण बच्चों के दाँत, हड्डियाँ व शरीर कमजोर हो जाते हैं।
'आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति' में भी कैल्शियम का बड़ा महत्व है। कैल्शियम को कमजोर व पतली हड्डियों को मजबूत करने, दिल की कमजोरी, गुर्दे की पथरियों को नष्ट करने और महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित रोगों के उपचार में लाभकारी पाया गया है।
इसलिए हमें प्रतिदिन कैल्शियम तत्व निम्न रूप से लेना चाहिए-
• गर्भवती व दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए 1200 मिलीग्राम।
• 6 मास से छोटे बच्चों के लिए 400 मिलीग्राम।
• 6 मास से 1 वर्ष के बच्चों के लिए 600 मिलीग्राम।
• 1 वर्ष से 10 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 800 मिलीग्राम।
• 11 वर्ष से ऊपर सभी आयु वर्ग के लिए 1200 मिलीग्राम।
दैनिक भोजन में हमें कुछ पदार्थों से कैल्शियम तत्व मिल सकता है जैसे पनीर, सूखी मछली, राजमा, दही, गरी गोला, सोयाबीन आदि। इसी प्रकार दूध एक गिलास (गाय) से 260 मिलीग्राम, दूध एक गिलास (भैंस) से 410 मिलीग्राम कैल्शियम मिलता है। प्रेशर कुकर में पकाए गए चावल, मोटे आटे की रोटी से हमें काफी कैल्शियम मिल सकता है। कैल्शियम उचित मात्रा में खाने से हमारी बुद्धि प्रखर होती है और तर्क शक्ति भी बढ़ती है। हरी पत्तेदार सब्जियों में भी यह तत्व पाया जाता है।
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निद्रा और स्वास्थ्य
जब आँख, कान, आदि ज्ञानेन्द्रियाँ और हाथ, पैर आदि कर्मेन्द्रियाँ तथा मन अपने-अपने कार्य में रत रहने के कारण थक जाते हैं, तब स्वाभाविक ही नींद आ जाती है। जो लोग नियत समय पर सोते और उठते हैं, उनकी शारीरिक शक्ति में ठीक से वृद्धि होती है। पाचकाग्नि प्रदीप्त होती है जिससे शरीर की धातुओं का निर्माण उचित ढंग से होता रहता है। उनका मन दिन भर उत्साह से भरा रहता है जिससे वे अपने सभी कार्य तत्परता से कर सकते हैं।
सोने की पद्धतिः
अच्छी नींद के लिए रात्रि का भोजन अल्प तथा सुपाच्य होना चाहिए। सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए। भोजन के बाद स्वच्छ, पवित्र तथा विस्तृत स्थान में अच्छे, अविषम एवं घुटनों तक की ऊँचाई वाले शयनासन पर पूर्व या दक्षिण की ओर सिर करके हाथ नाभि के पास रखकर व प्रसन्न मन से ईश्वरचिंतन करते-करते सो जाना चाहिए। पश्चिम या उत्तर की ओर सिर करके सोने से जीवनशक्ति का ह्रास होता है। शयन से पूर्व प्रार्थना करने पर मानसिक शांति मिलती है एवं नसों में शिथिलता उत्पन्न होती है। इससे स्नायविक तथा मानसिक रोगों से बचाव व छुटकारा मिलता है। यह नियम अनिद्रा रोग एवं दुःस्वप्नों का नाश करता है। यथाकाल निद्रा के सेवन से शरीर की पुष्टि होती है तथा बल और उत्साह की प्राप्ति होती है।
निद्राविषयक उपयोगी नियमः
रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे तक गहरी निद्रा लेने मात्र से आधे रोग ठीक हो जाते हैं। कहा भी हैः ‘अर्धरोगहरि निद्रा….‘
स्वस्थ रहने के लिए कम से कम छः घंटे और अधिक से अधिक साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए, इससे कम ज्यादा नहीं। वृद्ध को चार व श्रमिक को छः से साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए।
जब आप शयन करें तब कमरे की खिड़कियाँ खुली हों और रोशनी न हो।
रात्रि के प्रथम प्रहर में सो जाना और ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः 4 बजे नींद से उठ जाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है क्योंकि इस समय में ऋषि-मुनियों के जप-तप एवं शुभ संकल्पों का प्रभाव शांत वातावरण में व्याप्त रहता है। इस समय ध्यान-भजन करने से उनके शुभ संकल्पों का प्रभाव हमारे मनः शरीर में गहरा उतरता है। कम से कम सूर्योदय से पूर्व उठना ही चाहिए। सूर्योदय के बाद तक बिस्तर पर पड़े रहना अपने स्वास्थ्य की कब्र खोदना है।
नींद से उठते ही तुरंत बिस्तर का त्याग नहीं करना चाहिए। पहले दो-चार मिनट बिस्तर में ही बैठकर परमात्मा का ध्यान करना चाहिए कि ‘हे प्रभु ! आप ही सर्वनियंता हैं, आप की ही सत्ता से सब संचालित है। हे भगवान, इष्टदेव, गुरुदेव जो भी कह दो। मैं आज जो भी कार्य करूँगा परमात्मा सर्वव्याप्त हैं, इस भावना से सबका हित ध्यान में रखते हुए करूँगा।’ ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए।
निद्रानाश के कारणः
कुछ कारणों से हमें रात्रि में नींद नहीं आती अथवा कभी-कभी थोड़ी बहुत नींद आ भी गयी तो आँख तुरंत खुल जाती है। वात-पित्त की वृद्धि होने पर अथवा फेफड़े, सिर, जठर आदि शरीरांगों से कफ का अंश क्षीण होने के कारण वायु की वृद्धि होने पर अथवा अधिक परिश्रम के कारण थक जाने से अथवा क्रोध, शोक, भय से मन व्यथित होने पर नींद नहीं आती या कम आती है।
निद्रानाश के परिणामः
निद्रानाश से बदनदर्द, सिर में भारीपन, जड़ता, ग्लानि, भ्रम, अन्न का न पचना एवं वात जन्य रोग पैदा होते हैं
निद्रानाश से बचने के उपायः
तरबूज के बीज की गिरी और सफेद खसखस अलग-अलग पीसकर समभाग मिलाकर रख लें। यह औषधि 3 ग्राम प्रातः सायं लेने से रात में नींद अच्छी आती है और सिरदर्द ठीक होता है। आवश्यकतानुसार 1 से 3 सप्ताह तक लें।
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अच्छी नींद के लिए आयुर्वेद
पूरे दिन तरोताजा और उर्जा से भरपूर रहने के लिए जरूरी है कि आप रातभर अच्छी और सुकूनभरी नींद लें लेकिन चिंता, सोने का स्थान और परिस्थितियां आपकी नींद में बाधक हो सकती हैं।
योगा व ध्यान करें 
अगर कोई व्यक्ति नियमित रुप से योगा व ध्यान करता है तो उसे रात में नींद नहीं आने की समस्या होने की संभावना कम होती है। योगा आपके शरीर की थकान व तनाव को कम करता है जिससे आप अच्छी नींद ले सकते हैं।
चाय व कॉफी का परहेज जरूरी 
सोने से पहले या शाम के समय ज्यादा कॉफी या चाय नहीं पीएं क्योंकि चाय और कॉफी में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जिनसे उत्तेजना बढ़ती है और मस्तिष्क को जागृत कर देती है। ऐसे में नींद नहीं आने की समस्या हो सकती है।
  सोने का समय तय क रे 
अपने सोने व जागने का समय तय करें, इससे जब आपको आदत हो जाएगी तो अपने आप उस समय आपको नींद आने लगेगी। रात में ज्यादा देर तक नहीं जागें इससे नींद गायब हो जाती है इस कारण हानिकारक एडेरेनाइन हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। इसका नतीजा यह निकलता है कि आपको नींद ही नहीं आती है। तय समय पर खुद को सोने के लिए तैयार करें।
 टीवी से जरा दूरी भली
सोने से आधे घंटे पहले टीवी व कंप्यूटर के पास नहीं बैठे क्योंकि टीवी और कंप्यूटर की स्क्रीन से आने वाली रोशनी हमारे शरीर को ये एहसास दिलाती रहती है कि अभी दिन है। इस कारण हमारा शरीर सोने के लिए तैयार नहीं हो पाता। सोने से पहले आप किताबें पढ़ सकते हैं।
 म्‍यूजिक थेरेपी
संगीत में जादू होता है। ये मन की थकान को कम करता है, जिससे शरीर की थकान भी कम हो जाती है। सोने से पहले मधुर कीर्तन सुनें, नींद जल्दी आती है।
 पंजो की मसाज करें
खुद को अच्छी नींद के लिए पंजो का मसाज भी करें। दिनभर की थकान के बाद जब आपके पैरों में मसाज किया जाता है तो इससे आपको आराम मिलता है और नींद अच्छी आती है।
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आयुर्वेदिक ओषधे है घर का बना घी
ह्रदयरोग के साथ मोटापे और दिल के रोगियों का सबसे अधिक गुस्सा घी पर ही उतरता है। आयुर्वेद में घी को ओषधी माना गया है । इस सबसे प्राचीन सात्विक आहार से सर्वदेशों का निवारण होता है । वात और पित्त को शांत करने में सर्वश्रेष्ट है साथ ही कफ भी संतुलित होता है । इससे स्वस्थ वसा प्राप्त होती है , जो लीवर और रोग प्रतिरोधक प्रणाली को ठीक रखने के लिए जरूरी है । घर का बना हुआ घी बाजार के मिलावटी घी से कही बेहतार होता है । यह तो पूरा का पूरा सैचुरेटेड फैट है ,कहते हुए आप  इंकार में अपना सिर हिला रहे होगे । ज़रा धीरज रखे । घी में उतने अवगुण पाली अनासोचुरेतेड वसा को आग पर चढना अस्वास्थकर होता है ,क्योंकी ऐसा करने से पैराक्सैड्स और एनी फ्री रेडिकल्स निकलते है । इन पदार्थों की वजह से अनेक  बीमारिया और समस्याएँ पैदा होती है । इसका अर्थ यह भी है कि वनास्पतिजन्य सभी खाध्य तेल स्वास्थ केलिए कमोवेश हानिकारक  तो है ही।
फायदेमंद है घी
घी का मामला थोड़ा जुदा है। वो इसलिए कि घी का स्मोकिंग पाइंट दूसरी वसा ओं की तुलना में बहुत अधिक है । यही वजह है कि पकाते समय आसानी से नहीं जलता । घी में स्थिर सैचुरेटेड बाँडस बहुत अधिक होते है जिससे फ्री रेडीकल्स निकलने की आशंका बहुत कम होती है । घी की छोटी फैटी एसिड की चेन को शरीर बहुत जल्दी पचा लेता है । अब तक तो सभी यही समझा रहे थे कि देशी घी ही रोगों की सबसे बड़ी जड़ है ?
कोलेस्ट्राल कम होता है
घी पर हुए शोध बताते है कि इससे रक्त और आँतों में मोजूद कोलेस्ट्राल कम होता है । ऐसा इसलिए होता है , क्यों कि घी से बाइलारी लिपिड का स्राव बढ़ जाता है । घी नाही प्रणाली एवं मस्तिष्क की श्रेष्ट ओषधि माना गया है । इससे आँखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है , इसलिए ग्लूकोमा के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है । सकता है इस जानकारी ने आपको आश्चर्य में दाल दिया हो । घी पेट के एसिड्स के बहाव को बढाने में उत्प्रेरक का काम करता है जिससे पाचन क्रिया ठीक होती है । दूसरे अन्य वसा में यह गुण नहीं है । मक्खन , तेल आदि पाचन क्रिया को धीमा कर देते है और पेट में निष्क्रिय होकर बैठ जाते है । जाहिर है कि आप ऐसा नहीं चाहेगे । घी में भरपूर एंटी आक्सीडेट्स होते है तथा यह अन्य खाध्य पदार्थों से प्राप्त विटामिन और खनिजों को जज्ब करने में मदद करता है ।
यह शरीर के सभी ऊतकों की प्रत्येक सतह का पोषण करता है तथा रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूती प्रदान करता है । इसमें ब्यूटिरिक एसिड नामक फैटी एसिड भी भरपूर होता हैजिसे एंटीवायरल माना जाता है । एंटीवायरल विशेषता ओं के कारण कैसर की गठान की वृद्दि रूक जाती है । जलने के कारण हुए फफोलों पर घी बहुत अच्छा काम करता है । घी याददाश्त को बढाने और सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने में मदद करता है । ध्यान देने योग्य सलाह यह है की कोलेस्ट्राल की मात्रा कम हो लेकिन जिनका कोलेस्ट्राल पहले से ही बढ़ा हुआ है उन्हें घी से परहेज रखना चाहिए ।
घी खाएं या नहीं …
यदि आप स्वास्थ्य है, तो घी जरूर खाएं ,क्योंकी यह मक्खन से अधिक सुरक्षित है । इसमें तेल से अधिक पोषक तत्व है। आपने पंजाब और हरियाणा के निवासियों को देखा होगा । वे टनों घी खाते है ,लेकिन सबसे अधिक फिट और मेहनीत होते है ।यद्यपि घी पर अभी और शोधों के नतीजे आने शेष है , लेकिन प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में अल्सर , कब्ज , आँखों की बीमारियों के साथ त्वचा रोगों के इलाज के लिए घी का प्रयोग किया जाता है ।
क्या रखें सावधानियां ……
भैस के दूध के मुकाबले गाय के दूध में वसा की मात्रा कम होती है । इसलिए शुरू में निराश न हो । हमेशा इतना बनाएं की वह जल्दी ही ख़त्म हो जाए । अगले हफ्ते पुनः यही प्रक्रिया दोहराई जा सकती है । गाय के दूध में सामान्य दूध की ही तरह प्रदूषण का असर हो सकता है , मसलन कीटनाशक और कृत्रिम खाद के अंश चारे के साथ के पेट में जा सकते है । जैविक घी में इस तरह के प्रदूषण से बचने की कोशिश की जाती है । यदि संभव हो तो गाय के दूध में कीटनाशकों और रासायनिक खाद के अंश की जांच कराई जा सकती है । जिस तरह हर चीज की अति बुरी होती है इसी तरह घी का प्रयोग भी संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए ।
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तनाव को दूर करेगा ये मंत्र
ऊं को निराकार ब्रम्ह का स्वरूप माना गया है।ऊं की ध्वनि एक ऐसी ध्वनि है जिसकी गुंज को बहुत प्रभावशाली माना गया है। ऊं के उच्चारण के कई सारे फायदे हैं। ऊं की ध्वनि मानव शरीर के लिये प्रतिकुल डेसीबल की सभी ध्वनियों को वातावरण से निष्प्रभावी बना देती है।
- विभिन्न ग्रहों से आने वाली अत्यंत घातक अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रभाव ओम की ध्वनि की गुंज से समाप्त हो जाता है। मतलब बिना किसी विशेष उपाय के भी सिर्फ ओम् के जप से भी अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।- ऊँ का उच्चारण करने वाले के शरीर का विद्युत प्रवाह आदर्श स्तर पर पहुंच जाता है।
- इसके उच्चारण से इंसान को वाक्सिद्धि प्राप्त होती है।
- नींद गहरी आने लगती है। साथ ही अनिद्रा की बीमारी से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है।
-मन शांत होने के साथ ही दिमाग तनाव मुक्त हो जाता है।
Krantikari sant pu.shree parasmuni m.s.
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हेल्दी स्किन के लिए
यदि आपकी त्वचा तैलीय या सामान्य है , तो इस ठंडे मोसम का उस पर विशेष प्रभाव नहीं पडेगा , पर रूखी या शुष्क है , तो आपको इस मोसम में अतिरिक्त देख – रेख की जरूरत पड़ेगी ही । इस दिनों ठंडी हवाओं से त्वचा फट जाती है या शुष्क हो जाती है । सबसे ज्यादा चेहरे की त्वचा ही प्रभावित होती है । त्वचा की नमी बनाए रखना मुश्किल नहीं है । आप मोसम के अनुसार फेशियल करके इसे मोसम के कुप्रभावों से बच सकती है । इन दिनों फेशियल कैसे करें और किन चीजों का इस्तेमाल करें ,
चलिए जानते है …
सबसे पहले चेहरे की त्वचा को क्लींजिंग मिल्क से साफ करके पानी से धो लें । अब बराबर मात्रा में ग्लिसरीन और गुलाब जल मिलाकर उससे चेहरे की हल्की मालिश करें । गर्दन की हल्की मालिश पर हाथ थोड़े सख्ती से ऊपर की तरफ चलाएं । ठोडी की मालिश हाथों को बाहर ले जाते हुए करें ।
गालों पर गोलाई से मालिश करते हुए हाथ नीचे से ऊपर की और ले जाएं । इस प्रक्रिया से रक्त संचार बढेगा और गलों का गुलाबीपन  बना रहेगा । ललाट या माथे पर मालिश करते समय लेफ्ट से राइट की तरफ हाथों को थोड़ा टेढा करके चलाएं ।  आँखों की नजाकत का ध्यान रखते हुए उँगलियों को गोलाई  से इस तरह घुमाएं की ग्लिसरीन आँखों में न जाने पाएं , क्योंकी आँखों में यह जलन पैदा कर सकती है ।
ग्लिसरीन की मालिश होठों केलिए सर्दियों में जरूरी है । इससे सूखी त्वचा नाम हो जाती है और फेट होठों को राहत मिलती है । होठों की मालिश एक बार बाई और फिर एक बार दाई ओर से करें । नाक के लिए भी यह बेहतरीन मसाज है । इससे नाक की कठोर त्वचा भी मुलायम होकर चमकने लगेगी ।
सर्दियों में केवल यह मसाज दिन में समय मिलने पर दो – तीन बार आपने कर ली तो आपकी त्वचा की चमक देखने लायक होगी और इसका असर त्वचा पर स्थायी होगा ।
इन दिनों लगने वाले फेस पैक भी थोड़े अलग होते है । सबसे अच्छा पैक लाल चंदन के पाउडर का माना जाता है ।इसमें ताजी मलाई इतनी मात्रा में मिलाएं की गढ़ा पेस्ट बन जाए ।इस पेस्ट को नीचे से ऊपर की ओर गोलाई में हाथ चलाते हुए गर्दन और पूरे चेहरे पर लगाएं । पंद्रह – बीस मिनट बाद हल्के गरम पानी से धो लें । इससे त्वचा का रूखापन दूर हो जाएगा ।
शुष्क त्वचा होने पर बादाम के तेल में नींबू के रस की दो – तीन बूंद डालें और चंदन का पाउडर मिक्स करें । इसे चेहरे पर लगाएं । पांच – सात मिनट बाद हल्के हाथों से रगड़ते हुए उतार लें और हल्के गरम पानी से चेहरा धो लें । बादाम का तेल न हो तो मलायुक्त दूध भी काम में ले सकते है । इससे त्वचा की कोमलता बढ़ेगी और साथ ही सांवलापन भी ख़त्म होगा ।
त्वचा के तैलीय होने पर शहद में बेसन मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मलें और बाद में धो लें ।बेसन अतिरिक्त तेल को ख़त्म करेगा और शहद त्वचा के ढीलेपन को ख़त्म करके कसाव लाएगा । त्वचा की चमक भी शहद बनाए रखेगा ।
आप अधिक देर धूप में रहते है , तो रंगत पर असर होती ही है । ऐसी त्वचा पर कच्छा दूध और नीबू का रस रूई में लेकर धीरे – धीरे मलें । इससे त्वचा अपने असली रंग में आ आएगी । फिर पैक इस्तेमाल करें ।
समय न होने पर बादाम , जैतून , तिल या सरसों के तेल से मालिश करके हल्के गरम पानी में भिगोए निचुड़े तैलिए से त्वचा पर शुष्क हवावों का असर नहीं होगा और वह चिकनी व मुलायम बनी रहेगी ।
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मोटापा घटाने केलिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खेँ
मोटापे को लेकरकई लोग परेशानरहतें हैं और इससेछुटकारा पाना चाहतेंहैं ! कुछ उपाय ढूंढकर उनको प्रयोग में लातें हैं लेकिन कई बार ऐसा देखा गया हैकि हर उपाय हरआदमी के लिएफायदेमंदनहीं हो पाता हैजिसके कारणउनको निराश होनेकि आवश्यकतानहीं है औरउनको दुसरा उपायअपनाना चाहिए !आज में आपके सामनें मोटापे को दूर भगाने के लिए कुछ सामान्यआयुर्वेदिक नुस्खेँ लेकर आया हूँ! जिनका प्रयोग करके फायदा उठाया जा सकता है !
1. मूली के रस मेंथोडा नमक और निम्बूका रस मिलाकरनियमित रूप से पीने से मोटापा कमहो जाता है और शरीरसुडौल हो जाता है !
2. गेहूं, चावल, बाजराऔर साबुत मूंगको समान मात्रा मेंलेकर सेककरइसका दलियाबना लें !इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेदतिल 50 ग्रामभी मिला दें ! 50 ग्रामदलिये को 400मि.ली.पानी मेंपकाएं !स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें !नियमित रूप से एकमहीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनकलाभ होता है !
3. अश्वगंधा के एकपत्ते को हाथ सेमसलकर गोली बनाकर प्रतिदिनसुबह,दोपहर,शामको भोजन से एकघंटा पहलेया खाली पेट जल केसाथ निगल लें ! एकसप्ताह के नियमितसेवन के साथफल, सब्जियों, दूध, छाछ और जूस पर रहते हुए कईकिलो वजन कमकिया जा सकता है !
4. आहार में गेहूं केआटे और मैदा से बनेसभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें ! इसमें रोटी भीशामिल है !अपना पेट पहले के4-6 दिन तक केवलदाल, सब्जियां औरमौसमी फल खाकरही भरें ! दालों में आपसिर्फ छिलकेवाली मूंग कि दाल, अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडदकि दाल नहीं !सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं !गाजर, मूली, ककड़ी,पालक, पतागोभी, पके टमाटर औरहरी मिर्च लेकरसलाद बना लें ! सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च, सैंधा नमक, जीरा बुरककर औरनिम्बू निचोड़ करखाएं ! बस गेहूंकि बनी रोटी छोडकरदाल, सब्जी, सलाद और एक गिलास छाछका भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए ! इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं ! इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें !इसके बाद गेहूंकि बनी रोटी किजगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें !
5 किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें !6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में औरआधी मात्रा मेंदाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें ! एकमहीने बाद गेहूंकि रोटी खाना शुरूकर सकते हैं लेकिनशुरुआत एक रोटी सेकरते हुए धीरे धीरेबढाते जाएँ ! भादों केमहीने में छाछका प्रयोगनहीं किया जाता हैइसलिए इस महीनें मेंछाछ का प्रयोगनां करें !!
5. एरण्ड की जड़का काढ़ा बनाकरउसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमितसेवन करने सेमोटापा दूरहोता है !!
6. चित्रक कि जड़का चूर्ण एक ग्रामकी मात्रा में शहद केसाथ सुबह शामनियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है !!
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10 भयावह सच जो डॉक्टर मरीज को नहीं बताते. !
      
1. दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है अक्सर डायबिटीज शरीर में इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।
2. बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी के इलाज के लिए लगाई जाती है। परन्तु कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं तो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है जैसे कि फ्लू वायरस की वैक्सीन। बच्चों को दिए जाने वाली वैक्सीन डीटीएपी केवल बी.परट्यूसिस से लड़ने के लिए बनाई गई है जो कि बेहद ही मामूली बीमारी है। परन्तु डीटी एपी की वैक्सीन फेफड़ों के इंफेक्शन को आमंत्रित करती है जो दीर्घकाल में व्यक्ति की इम्यूनिटी पॉवर को कमजोर कर देती है।
3. कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता यूं तो कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री ए ंजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।
4. दवाईयां कैंसर पैदा करती हैं ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाईयों से कैन्सर होने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाईयां शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लॉकर्स की संख्या बढ़ा देता है जिससे शरीर में कोशिकाओं के मरने की दर बढ़ जाती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर कैंसर की गांठ बनाने में लग जाती हैं।
5. एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आ ंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले पेशेंट्स में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।
6. एक्स-रे से कैन्सर होता है आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
7. सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है। इनमें से एक सीने में जलन का होना भी है जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।
8. दवाईयों और लैब-टेस्ट से डॉक्टर्स कमाते हैं मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।
9. जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं है नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। जुकाम पर आपके दवाई लेने का कोई असर नहीं होता है, हां आपके शरीर को एंटीबॉयोटिक्स के साईड-इफेक्टस जरूर झेलने पड़ते हैं।
10. एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को नुकसान होता है मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स जैसे पैरासिटेमोल ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन तस्वीर के दूसरे पक्ष के रूप में एंटीबॉयोटिक्स व्यक्ति के लीवर को डेमेज करती है। यदि लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग कि या जाए तो व्यक्ति की किडनी तथा लीवर बुरी तरह से प्रभावित होते हैं और उनका ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
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गर्म पानी के फायदे
अगर आप स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं या ग्लोइंग स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स यूज करके थक चूके हैं तो रोजाना एक गिलास गर्म पानी पीना शुरू कर दें। आपकी स्किन प्रॉब्लम फ्री हो जाएगी व ग्लो करने लगेगी।
लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अगर पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है। दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है।
गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती है व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
भूख बढ़ाने में भी एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पीएं। इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा।
खाली पेट गर्म पानी पीने से मूत्र से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। दिल की जलन कम हो जाती है। वात से उत्पन्न रोगों में गर्म पानी अमृत समान फायदेमंद हैं।
गर्म पानी के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है। पसीने के माध्यम से शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं।
बुखार में प्यास लगने पर मरीज को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। गर्म पानी ही पीना चाहिए बुखार में गर्म पानी अधिक लाभदायक होता है।
यदि शरीर के किसी हिस्से में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है।
अधिकांश पेट की बीमारियां दूषित जल से होती हैं यदि पानी को गर्म कर फिर ठंडा कर पीया जाए तो जो पेट की कई अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी।
गर्म पानी पीना बहुत उपयोगी रहता है इससे शक्ति का संचार होता है। इससे कफ और सर्दी संबंधी रोग बहुत जल
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ज्‍यादा नींबू पानी पीने के साइड इफेक्‍ट ज्‍यादातर लोग सुबह उठते ही नींबू पानी का सेवन वजन कम करने या फिर शरीर को अंदर से साफ करने के लिये करते हैं। पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से शरीर को विटामिन सी, पोटैशियम और फाइबर प्राप्‍त होता है। हांलाकि इसका ज्‍यादा सेवन करने से कुछ साइड इफेक्‍ट भी हो सकते हैं। READ: नींबू पानी पीने का फायदा ज्‍यादा नींबू पानी पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और डीहाइड्रेशन की समस्‍या बढ़ जाती है। इसके अलावा कई लोगों को दांतों में ठंडा-गरम भी महसूस होने लगता है। READ: ज्‍यादा नींबू के सेवन से हो सकते हैं ये साइड इफेक्‍ट इसके अलावा ऐसी कई और समस्‍याएं हैं, जो कि ज्‍यादा नींबू पानी पीने से हो सकती हैं। नींबू पानी का नियमित सेवन करने पहले एक बार डॉक्‍टर की सलाह जरुर ले लें। आइये जानते हैं अधिक नींबू पानी के सेवन से क्‍या-क्‍या साइड इफेक्‍ट हो सकते हैं। 1.. गुर्दे और पित्ताशय की थैली की समस्‍या नींबू में एसिडिक लेवल के अलावा उसमें ऑक्‍सलेट भी होता है, जो कि ज्‍यादा सेवन से शरीर में जा कर क्रिस्‍टल बन सकता है। ये क्रिस्‍टलाइज्‍ड ऑक्‍सलेट, किडनी स्‍टोन और गॉलस्‍टोन का रूप ले सकता है।
2.. पेट हो सकता है खराब कई बार लोग खाना पचाने के लिये नींबू के रस का सेवन करते हैं क्‍योंकि इसका एसिड पाचन में मदद करता है। पर पेट में अधिक एसिड हो जाने की वजह से पेट खराब हो सकता है। नींबू को हमेशा खाने में मिला कर ही खाएं।
3. सीने में जलन अगर आपको एसिडिटी की समस्‍या है तो, नींबू का सेवन एक दम बंद कर दीजिये क्‍योंकि इसमें एसिड होता है।
4.. दांतों में ठंडा-गरम लगना नींबू में सिट्रस एसिड होता है, जिसका दांतों में ज्‍यादा संपर्क होने से दांत संवेदनशील हो जाते हैं। अगर आपको नींबू पानी पीना भी है तो उसे हमेशा स्‍ट्रॉ से पियें, जिससे पानी दांतों को न छुए।
5.. नींबू पानी को कभी भी किसी प्रकार की बीमारी को दूर करने के लिये नहीं पीना चाहिये। अगर आपको इसे पीने के बाद कोई साइड इफेक्‍ट लगे, तो इसका सेवन तुरंत ही बंद कर दें। अगर आपको इसे विटामिन सी प्राप्‍त करने के लिये पीना है, तो केवल आधा नींबू निचोड़ कर आधे गिलास पानी में मिक्‍स कर के पियें -
गर्मी में पुदीना खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। ये एक बहुत अच्छी औषधि भी है साथ ही इसका सबसे बड़ा गुण यह है कि पुदीने का पौधा कहीं भी किसी भी जमीन, यहां तक कि गमले में भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी उर्वरक की आवश्यकता नहीं पडती है।
थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिए पर्याप्त है। पुदीना को किसी भी समय उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर प्रयोग में लाया जा सकता है।
- हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर बाद चेहरा ठंडे पानी से धो लें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरा निखर जाएगा।
-अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाए तो एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और -आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।
- पेट में अचानक दर्द उठता हो तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे।
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त्वचा रोग होने पर यह करें
त्वचा संबंधी रोग केतु के दुष्प्रभाव से बढ़ते हैं। यदि त्वचा संबंधी घाव ठीक न हो रहा हो तो सायंकाल मिट्टी के नए पात्र में पानी रखकर उसमें सोने की अंगूठी या एनी कोइ आभूषण दाल दें। कुछ देर बाद उसी पानी से घाव को धोने के बाद अंगूठी निकालकर रख लें तथा पाने किसी चौराहे पर फेंक आएं। ऐसा तीन दिन करें तो रोग शीघ्र ठीक हो जाएगा।
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आइये जाने छिलका क्या -क्या करता है.......
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* खरबूजे को छिलका समेत खाने से कब्ज दूर होती है।
* खीरे के छिलके से भी कीट और झींगुर भागते हैं।
* पपीते के छिलके सौंदर्यवर्धक माने जाते हैं। त्वचा पर लगाने से खुश्की दूर होती है। एड़ियों पर लगाने से वे मुलायम होती हैं।
* चोट लगने पर केले के छिलके को रगड़ने से रक्तस्राव रुक जाता है।
* कच्चे केले के छिलकों से चटपटी सब्जी बनती है।
* मटर के मुलायम छिलकों की भी स्वादिष्ट सब्जी बनती है।
* टमाटर और चुकंदर के छिलकों को चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है और होठों की लालिमा बढ़ती है।
* करेला जितना गुणकारी होता है उसके छिलके भी उतने फायदेमंद होते हैं। अलमारी में रखने से कीट भागते हैं।
* तोरी और घीया के छिलके की सब्जी भी पेट रोगों में फायदा पहुँचाती है।
अनार का छिलका :-
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* जिन महिलाओं को अधिक मासिक स्राव होता है वे अनार के सूखे छिलके को पीसकर एक चम्मच पानी के साथ लें। इससे रक्त स्राव कम होगा और राहत मिलेगी।
* जिन्हें बवासीर की शिकायत है वे अनार के छिलके का 4 भाग रसौत और 8 भाग गुड़ को कुटकर छान लें और बारीक-बारीक गोलियां बनाकर कुछ दिन तक सेवन करें। बवासीर से जल्दी आराम मिलेगा।
* अनार के छिलके को मुंह में रखकर चूसने से खांसी का वेग शांत होता है।
* अनार को बारीक पीसकर उसमें दही मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाकर सिर पर मलें। इससे बाल मुलायम होते हैं।
काजू का छिलका :-
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* काजू के छिलके से तेल निकालकर पैर के तलवे और फटे हुए स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।
बादाम का छिलका :-
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* बादाम के छिलके व बबुल की फल्लियों के छिलके व बीज को जलाकर पीसकर थोड़ा नमक डालकर मंजन करें। इससे दांतों के कष्ट दूर होते हैं, मसूढ़ें स्वस्थ एवं दांत मजबूत बनता है।
नारियल का छिलका :-
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* नारियल का छिलका जलाकर महीन पीसकर दांतों पर घिसने से दांतें साफ होते हैं।
नारंगी का छिलका :-
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* दूध में नारंगी का छिलका छानकर दूध के साथ नियमित सेवन करने से खून साफ होता हैं।
पपीते का छिलका :-
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* पपीते के छिलके को धूप में सूखाकर, खूब बारीक पीसकर ग्लिसरीन के साथ मिलाकर लेप बनावें व चेहरे पर लगाये, मुंह की खुश्की दूर होती है।
लौकी का छिलका :-
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* लौकी के छिलके को बारीक पीसकर पानी के साथ पीने से दस्त में लाभ होता है।
तोरई का छिलका :-
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* तोरई का ताजा छिलका त्वचा पर रगड़ने से त्वचा साफ होती है।
इलायची का छिलका :_
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* इलायची के छिलके चाय की पत्तियां या शक्कर में डाल दें तो चाय स्वादिष्ट बनेगी।
संतरे का छिलका :_
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* संतरे के छिलके को दूध में पीसकर छान लें। इसे कच्चे दूध व हल्दी में मिलाकर चेहरे पर लगाये। इससे जहां चेहरे के दुश्मन मुहांसों-धब्बों का नाश होता है, वहीं त्वचा जमक उठता है।
तरबूज का छिलका :-
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* दाद, एकजीमा की शिकायत होने पर तरबूज के छिलकों को सूखाकर, जलाकर राख बना लें। तत्पश्चात् उस राख को कड़ुवे तेल में मिलाकर लगाये।
नींबू का छिलका :_
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* नींबू का छिलका दांत पर मलने से दांत चमकदार बनता है और मसूढ़ें भी मजबूत बनता है।
* नींबू का छिलका जूते पर रगड़े व कुछ देर के लिए धूप में रख दें। फिर जूतों पर मालिश करें। जूतों में चमक आ जायेगी।
* नींबू व संतरा के छिलकों को सूखाकर, खूब महीन चूर्ण बनाकर दांत पर घिसें। दांत चमकदार बनते हैं।
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मधुमेह अपनाएं यह घरेलू उपचार-
1.मेथी- मधुमेह को ट्रीट करने में मेथी बहुत बडा रोज प्‍ले करती है। अगर आप रोज़ 50 ग्राम मेथी नियमित रुप से खाएगें तो निश्‍चित ही आपका ग्‍लूकोज़ लेवल नीचे चला जाएगा और आपको इस बीमारी से राहत मिल जाएगी।
2.करेला- डायबिटीज के निदानों में यह भी एक महत्‍वपूर्ण खोजों में से एक है। करेले का प्रयोग एक प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में किया जाता है क्‍योंकि इसमें कैरेटिन नामक रसायन होता है जिसके दा्रा खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।
3.जामुन- इस फल का रस, पत्‍ती और बीज मधुमेह की बीमारी को जड़ से खतम कर देते हैं। जामुन के सूखे बीजों को पाउडर बना कर एक चम्‍मच दिन में दो बार पानी या दूध के साथ लेने से राहत मिलती है। इससे अग्न्याशय पर काफी अच्‍छा असर पड़ता है।
4.आमला- अगर एक चम्‍मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पिएगें तो मधुमेह की इस्‍से अच्‍छी दवा और कोई नहीं होगी।
5.आम की पत्‍ती- 15 ग्राम ताजे आम के पत्‍तों को 250 एमएल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्‍तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी लाभ होता है।
6.शहद- कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्‍यूट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। जिन लोगों को यह बीमारी होती है उन्‍हें चीनी की जगहं पर शहद खाने को कहा जाता है।
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टमाटर के फायदे .....
1. भोजन करने से पहले दो या तीन पके टमाटरों को काटकर उसमें पिसी हुई कालीमिर्च, सेंधा नमक एवं हरा धनिया मिलाकर खाएं। इससे चेहरे पर लाली आती है व पौरूष शक्ति बढ़ती है। पेट में कीड़े होने पर सुबह खाली पेट टमाटर में पिसी हुई कालीमिर्च लगाकर खाने से लाभ होता है।डाइबिटीज व दिल के रोगों में भी टमाटर बहुत उपयोगी होता है। प्रात: बिना कुल्ला किए पका टमाटर खाना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है। टमाटर खाने वालों को कैन्सर रोग नहीं होता।
2. दमा रोगियों को चाहिए कि वे पूरे वर्ष टमाटर उपलब्ध रखें। इसके नियमित सेवन से श्वासनली शोथ कम होता है। प्राकृतिक चिकित्सकों का कहना है कि टमाटर खाने से अतिसंकुचन भी दूर होता है और खाँसी तथा बलगम से भी राहत मिलती है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
3. टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है।टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर होते हैं और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनसे आपके वजन में जरा भी वृद्धि नहीं होगी। इसके अलावा यह पूरे शरीर के छोटे-मोटे विकारों को दूर करता है।
5. टमाटर के गूदे में दूध व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर चमक आती है। टमाटर झुर्रियों को कम करता है और रोम छिद्रों को बड़ा करता है। इसके लिए टमाटर और शहद के मिश्रण वाला फेस पैक इस्तेमाल करें। टमाटर के छिलके और बीज को निकाल दें। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है।
6. टमाटर में विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता है, यह आँखों के लिए बहुत लाभकारी है। टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है। इसके लगातार सेवन से जिगर बेहतर ढंग से काम करता है और गैस की शिकायत भी दूर होती है।जो लोग अपना वजन कम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए टमाटर एक वरदान है। एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे पतला होने के भोजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
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थायराईड रोगों का प्राकृतिक और घरेलू पदार्थों से उपचार:-
१) थायराईड रोगों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस (नारियल पानी, पत्तागोभी, अनानास, संतरा, सेब, गाजर, चकुन्दर, तथा अंगूर का रस) पीना चाहिए तथा इसके बाद 3 दिन तक फल तथा तिल को दूध में डालकर पीना चाहिए। इसके बाद रोगी को सामान्य भोजन करना चाहिए जिसमें हरी सब्जियां, फल तथा सलाद और अंकुरित दाल अधिक मात्रा में हो। इस प्रकार से कुछ दिनों तक उपचार करने से रोग ठीक हो जाता है।
२) इस रोग से पीड़ित रोगी को कम से कम एक वर्ष तक फल, सलाद, तथा अंकुरित भोजन का सेवन करना चाहिए।
३) सिंघाड़ा, मखाना तथा कमलगट्टे का सेवन करना भी लाभदायक होता है।
थायराइड रोगों से पीड़ित रोगी को तली-भुनी चीजें, मैदा, चीनी, चाय, कॉफी, शराब, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
एक कप पालक के रस में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर फिर चुटकी भर जीरे का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात के समय में सोने से पहले सेवन करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है।
इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को उन चीजों का भोजन में अधिक प्रयोग करना चाहिए जिसमें आयोडीन की अधिक मात्रा हो।
एक गिलास पानी में 2 चम्मच साबुत धनिये को रात के समय में भिगोकर रख दें तथा सुबह के समय में इसे मसलकर उबाल लें। फिर जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो खाली पेट इसे पी लें तथा गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है ।
इस रोग से पीड़ित रोगी को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए ताकि थकावट न आ सकें और रोगी व्यक्ति को पूरी नींद लेनी चाहिए। मानसिक, शारीरिक परेशानी तथा भावनात्मक तनाव यदि रोगी व्यक्ति को है तो उसे दूर करना चाहिए ।
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भिंडी के गुणों के बारे में जानते हैं :-
1. मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद
भिंडी में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित होता है। भिंडी खून में पहले से मौजूद शुगर के अंश को सोख लेती है और ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाने में मदद करती है। मैक्स की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. सुनिता रॉय चौधरी के मुताबिक शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने में भी भिंडी मददगार होती है। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है या फिर आप शुगर की आशंका से दूर रहते हैं।
2. पेट के लिए वरदान
भिंडी हमारी आंतों के लिए फिल्टर का काम करती है। यह पेट के पित्त, अम्ल और कोलेस्ट्रॉल को बांध देती है, जिससे आंत को नुकसान नहीं पहुंचता। भिंडी आंतों की खराश को भी दूर करती है। इसलिए पेचिश या गैस की समस्या में भी भिंडी काम आती है। भिंडी शरीर में एसिड को भी बेअसर बनाती है और पाचनतंत्र के कवच के रूप में सुरक्षा करती है।
3. प्रोबायोटिक्स बनाती है
भिंडी हमारे शरीर में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया को मजबूत करती है। इसके साथ-साथ भिंडी शरीर में प्रोबायोटिक्स के विकास में भी मदद करती है, जिससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और पाचन तंत्र बेहतर होता है।
4. मूत्र की जलन समाप्त करती है
भिंडी पेशाब की जलन को दूर करती है। इसे खाने से पेशाब खुलकर और साफ आता है। इसलिए पेशाब की जलन होने पर भिंडी का सेवन करना चाहिए।
5. कमजोरी या थकावट में भी कारगर
कमजोरी, थकावट महसूस करने वालों के लिए भिंडी ऊर्जावर्धक दवा की तरह काम करती है। डॉक्टरों के मुताबिक भिंडी डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होती है।
6. जोड़ों का दर्द होता है कम
भिंडी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ हमारी हड्डियों के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा भिंडी में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के लिए लाभकारी होता है। यह जोडमें को लचीला बनाती है।
7. अस्थमा के रोगियों के लिए लाभकारी
भिंडी अस्थमा के रोगियों के लिए भी काफी लाभकारी साबित होती है। भिंडी में पाया जाने वाला विटामिन सी अस्थमा के लक्षण को पनपने से रोकता है। इसके अलावा भिंडी फेफडमें में सूजन और गले में खराश को ठीक करती है।
8. आंखें कमजोर हैं तो जरूर खाएं
भिंडी में विटामिन ‘ए’ की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो आंखों के लिए उपयोगी होता है। डॉ. चौधरी के मुताबिक जिन लोगों की आंखें कमजोर होती हैं, उन्हें भिंडी खाने की सलाह दी जाती है। खाने में यदि भिंडी शामिल कर लिया जाए तो आंखों की रोशनी तो दुरुस्त होगी ही, आंखों से संबंधित कई अन्य समस्याएं भी ठीक होती हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक भिंडी मोतियाबिंद के जोखिम को भी कम करती है, हालांकि भारत में अभी इस पर शोध जारी है।
9. खूबसूरत होता है चेहरा
भिंडी में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इस लिहाज से यह हमारी त्वचा के लिए भी वरदान है। त्वचा को पिंपल फ्री बनाना हो या चेहरे को चिकना और चमकदार बनाना हो, भिंडी हमेशा असरदार साबित होती है।
10. बालों की कंडीशनिंग
बेजान और रूखे बालों में बाउंस लाने के लिए भी आप भिंडी का इस्तेमाल कर सकते हैं। भिंडी को तब तक उबालें, जब तक कि वह एकदम पतली न हो जाए। फिर उस पानी में नींबू निचोड़कर बालों में लगाएं। इससे बालों की अच्छी कंडीशनिंग होगी और बालों में जान लौट आएगी।
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पथरी की समस्या से छुटकारा :-
1 सेब का सिरका-  यह एक ऐसा उपाय है, जो आपको स्टोन के दर्द से भी तुरंत निजात दिलाता है। प्रतिदिन सेब के सिरके का प्रयोग करने से इसमें पाया जाने वाला मेलिक ऐसिड धीरे-धीरे स्टोन को गला देता है।
2  नींबू और जैतून का तेल- नींबू के रस में बराबर मात्रा में जैतून का तेल मिलाकर, दिन में दो या तीन बार लेने से पथरी में लाभ होता है। नींबू में मौजूद साइट्रि‍क एसिड पथरी को गलाने में मदद करता है।
3  गेहूं के जवारे –  गेहूं के जवारों को पानी में उबालकर, उस पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना पथरी की समस्या में बेहद लाभदायक उपाय है।
4 पुदीना – पथरी में पुदीने का सेवन बहुत अच्छा होता है। इसमें उपस्थित टेरपेन पथरी को गलाने में सहायक होता है। पुदीने का रस या पुदीने की चाय पीने से लाभ मिलता है।यह पित्त प्रवाह को बेहतर कर, पाचक रसों को उत्तेजित करता है।
5  ईसबगोल –   सोने से पहले ईसबगोल का पानी के साथ सेवन पि‍त्त की पथरी को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
6 सलाद –  पथरी की समस्या होने पर सलाद का भरपूर सेवन करना बेहद लाभदायक होता है। इसमें खास तौर से गाजर, खीरा और चुकंदर का प्रयोग काफी अच्छा होता है। शिमला मिर्च खाने से भी पथरी में लाभ होता है।
7  साबुत अनाज –  पथरी होने पर साबुत भीगे हुए अनाज खाने पर कफी फायदा मिलता है। मूंग, चना, सेब आदि रात को भिगो कर रख दें, और सुबह अंकुरित होने पर खाएं। यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद है।
8  नाशपाती व अनार – नाशपाती का सेवन पथरी में बेहद कारगर है। इसमें पेक्टिन पाया जाता है, जो पथरी को गलाने में मदद करता है। इसके अलावा अनार के एस्ट्रिजेंट गुण पथरी को गलाने में सहायक है।
9  तरबूज – तरबूज में भरपूर मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है, जो यूरिन में एसिड के स्तर को नियंत्रित करता है। यह पथरी में काफी फायदेमंद साबित होता है। इसमें पानी की मात्रा में अधिक होती है, जो पथरी को शरीर से बाहर करने में सहायक है।
10  राजमा – राजमा का आकार किडनी जैसा होता है, इसलिए इसे किडनी बीन्स भी कहा जाता है। यह किडनी और ब्लेडर संबंधी सभी समस्याओं में कारगर होता है। किडनी की पथरी में  भि‍गोए हुए राजमा का पानी पीने से भी लाभ मिलता है।
11  नींबूपानी – नींबू के रस में सेंधा नमकर मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीने से हर तरह की पथरी गलकर, शरीर से बाहर निकल जाती है।
12  यह न खाएं – पथरी होने पर कैल्शियम अधिक मात्रा में लेने से बचें। पालक, टमाटर और दूध से बनी चीजों को खाने से बचना चाहिए।
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पेट की गैस को ठीक करने के उपाय
मानसिक तनाव, अशांति, भय, चिंता, क्रोध के कारण पाचन अंगों के आवश्यक पाचक रसों का स्राव कम हो जाता है, जिससे अज्रीर्ण(Indigestion) की तकलीफ हो जाती है और अज्रीर्ण का विकृत रूप गैस कि बिमारी पैदा कर देता है।
भोजन मेंमूंग, चना, मटर, अरहर, आलू, सेम, चावल, तथा तेज मिर्च मसाले युक्त आहारअधिक मात्रा में सेवन न करें! शीर्घ पचने वाले आहार जैसे सब्जियां, खिचड़ी, चोकर सहित बनी आटें कि रोटी, दूध, तोरई, कद्दू, पालक, टिंडा, शलजम, अदरक, आवंला, नींबू आदि का सेवन अधिक करना चाहिए।
भोजन खूब चबाचबा कर आराम से करना चाहिए! बीच बीच में अधिक पानी ना पिएं! भोजन के दोघंटे के बाद 1 से 2 गिलास पानी पिएं। दोनों समय के भोजन के बीच हल्कानाश्ता फल आदि अवश्य खाएं।
तेल गरिष्ठ भोजन से परहेज करें! भोजन सादा, सात्त्विक और प्राक्रतिक अवस्था में सेवन करने कि कोशिश करें।
दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी का सेवन अवश्य करें।
प्रतिदिन कोई नकोई व्यायाम करने कि आदत जरुर बनाएं! शाम को घूमने जाएं! पेट के आसनसे व्यायाम का पूरा लाभ मिलता है। प्राणयाम करने से भी पेट की गैस की तकलीफदूर हो जाती है।
शराब, चाय, कॉफी, तम्बाकू, गुटखा, जैसे व्यसन से बचें।
प्राक्रतिक वेगों को रोके रखने कि आदत को छोड़ें जैसे मूत्र या मल।
दिन में सोना छोड़ दें और रात को मानसिक परिश्रम से बचें|
एक चम्मच अजवाइन के साथ चुटकी भर काला नमक भोजन के बाद चबाकर खाने से पेट कि गैस शीर्घ ही निकल जाती है|
अदरकऔर नींबू का रस एक एक चम्मच कि मात्रा में लेकर थोड़ा सा नमक मिलकर भोजनके बाद दोनों समय सेवन करने से गैस कि सारी तकलीफें दूर हो जाती हैं , औरभोजन भो हजम हो जाता है!
भोजन करते समय बीच बीच में लहसुन, हिंग, थोड़ी थोड़ी मात्रा में खाते रहने से गैस कि तकलीफ नहीं होती|
हरड, सोंठ काचूर्ण आधा आधा चम्मच कि मात्रा में लेकर उसमे थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकरभोजन के बाद पानी से सेवन करने से पाचन ठीक प्रकार से होता है और गैस नहींबनती!
नींबू का रस लेने से गैस कि तकलीफ नहीं होती और पाचन क्रिया सुधरती है....
Krantikari sant pu.shree parasmuni m.s.
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रोगों से मुक्ति दिलाते हैं ये टोटके
कुछ रोग असाध्य होते हैं तो कुछ सामान्य। कुछ रोगों में बहुत उपचार करवाने के बाद भी कुछ रोगों में कोई लाभ नहीं होता। ऐसे समय में व्यक्ति जीवन से हताश हो जाता है। यह किसी ग्रह के बुरे प्रभाव के कारण या फिर बुरी नजर लगने के कारण भी हो सकता है। नीचे साधारण रोगों के निवारण के लिए कुछ उपाय लिखे हैं। इनके करने से रोगी व्यक्ति को आराम मिलता है।
उपाय
1- लाल चंदन की माला से सूर्यदेव के मंत्र का जप प्रतिदिन 108 बार करें। इससे चर्म रोग में राहत मिलती है।
मंत्र- ऊँ ह्रीं घृणीं सूर्य आदित्याय नम:
2- किसी को मिरगी का रोग हो तो सूर्य यंत्र का निर्माण करके उसे धारण करने तथा नियमित सूर्य मंत्र का जप करने से लाभ होता है।
3- जायफल में सुराख करके लाल धागे से गले में धारण करने से मिरगी रोग में फायदा मिलता है।
4- लकवा रोग से मुक्ति के लिए मंगल यंत्र के सामने मंगल मंत्र का जप करें तथा 43 दिनों तक लगातार तांबे का एक चौकोर टुकड़ा लकवे से ग्रस्त अंग से स्पर्श कहाकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें। इससे लकवा रोगी ठीक हो जाता है।
5- आधासीसी दर्द से छुटकारा पाने के लिए विधि-विधानपूर्वक बुध यंत्र के सामने बुध मंत्र का जप जप करें। साथ ही बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाएं। इस प्रयोग से शीघ्र लाभ होता है।
6- गुरु यंत्र के नियमित दर्शन से थॉइराइड रोग में आराम मिलता है।
7- बवासीर रोग से मुक्ति पाने के लिए गुरु यंत्र के सामने गुरु मंत्र का जप करें तथा एक सफेद कागज पर अष्टगंध द्वारा गुरु यंत्र बनाकर नाभि पर बांधने से इस रोग में आराम मिलता है।
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अनमोल कैल्शियम बनाएँ मजबूत हड्डियाँ
प्रत्येक युवक की यह तमन्ना होती है कि उसकी भुजाएँ बलिष्ठ हों और चेहरे से ज्यादा आकर्षण पूरे शरीर में दिखे। इसके लिए वे तरह-तरह के व्यायाम करते हैं और अत्याधुनिक मशीनी सुविधाओं से सज्जित जिम में भी जाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि मजबूत भुजाएँ और बलिष्ठ शरीर के लिए कैल्शियम का कितना महत्व है?
आइए देखते हैं हमारे भोजन मे यह किस तरह से मिलता है और शरीर को मजबूती प्रदान करता है। इसके महत्व को आमतौर पर सभी माताएँ जानती हैं। बच्चों को दिन में दो-तीन बार जबरन दूध पिलाने वाली आज की माताएँ जानती हैं कि कैल्शियम उसकी बढ़ती हड्डियों के लिए कितना जरूरी है। वहीं पुराने समय की या कम पढ़ी-लिखी ग्रामीण माताएँ भी इतना तो अवश्य जानती थीं कि दूध पीने से बच्चे का डील-डौल व कद बढ़ता है। यह बच्चे को चुस्त व बलिष्ठ भी बनाता है। भले ही उन्हें दूध में पाए जाने वाले अनमोल कैल्शियम का ज्ञान न हो, जो बच्चों की हड्डियों, दाँतों के स्वरूप, उनके आकार व उन्हें स्वस्थ व मजबूत बनाने में अति सहायक सिद्ध हुआ है। इसी कैल्शियम की निरंतर कमी के कारण बच्चों के दाँत, हड्डियाँ व शरीर कमजोर हो जाते हैं।
'आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति' में भी कैल्शियम का बड़ा महत्व है। कैल्शियम को कमजोर व पतली हड्डियों को मजबूत करने, दिल की कमजोरी, गुर्दे की पथरियों को नष्ट करने और महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित रोगों के उपचार में लाभकारी पाया गया है।
इसलिए हमें प्रतिदिन कैल्शियम तत्व निम्न रूप से लेना चाहिए-
• गर्भवती व दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए 1200 मिलीग्राम।
• 6 मास से छोटे बच्चों के लिए 400 मिलीग्राम।
• 6 मास से 1 वर्ष के बच्चों के लिए 600 मिलीग्राम।
• 1 वर्ष से 10 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 800 मिलीग्राम।
• 11 वर्ष से ऊपर सभी आयु वर्ग के लिए 1200 मिलीग्राम।
दैनिक भोजन में हमें कुछ पदार्थों से कैल्शियम तत्व मिल सकता है जैसे पनीर, सूखी मछली, राजमा, दही, गरी गोला, सोयाबीन आदि। इसी प्रकार दूध एक गिलास (गाय) से 260 मिलीग्राम, दूध एक गिलास (भैंस) से 410 मिलीग्राम कैल्शियम मिलता है। प्रेशर कुकर में पकाए गए चावल, मोटे आटे की रोटी से हमें काफी कैल्शियम मिल सकता है। कैल्शियम उचित मात्रा में खाने से हमारी बुद्धि प्रखर होती है और तर्क शक्ति भी बढ़ती है। हरी पत्तेदार सब्जियों में भी यह तत्व पाया जाता है।
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निद्रा और स्वास्थ्य
जब आँख, कान, आदि ज्ञानेन्द्रियाँ और हाथ, पैर आदि कर्मेन्द्रियाँ तथा मन अपने-अपने कार्य में रत रहने के कारण थक जाते हैं, तब स्वाभाविक ही नींद आ जाती है। जो लोग नियत समय पर सोते और उठते हैं, उनकी शारीरिक शक्ति में ठीक से वृद्धि होती है। पाचकाग्नि प्रदीप्त होती है जिससे शरीर की धातुओं का निर्माण उचित ढंग से होता रहता है। उनका मन दिन भर उत्साह से भरा रहता है जिससे वे अपने सभी कार्य तत्परता से कर सकते हैं।
सोने की पद्धतिः
अच्छी नींद के लिए रात्रि का भोजन अल्प तथा सुपाच्य होना चाहिए। सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए। भोजन के बाद स्वच्छ, पवित्र तथा विस्तृत स्थान में अच्छे, अविषम एवं घुटनों तक की ऊँचाई वाले शयनासन पर पूर्व या दक्षिण की ओर सिर करके हाथ नाभि के पास रखकर व प्रसन्न मन से ईश्वरचिंतन करते-करते सो जाना चाहिए। पश्चिम या उत्तर की ओर सिर करके सोने से जीवनशक्ति का ह्रास होता है। शयन से पूर्व प्रार्थना करने पर मानसिक शांति मिलती है एवं नसों में शिथिलता उत्पन्न होती है। इससे स्नायविक तथा मानसिक रोगों से बचाव व छुटकारा मिलता है। यह नियम अनिद्रा रोग एवं दुःस्वप्नों का नाश करता है। यथाकाल निद्रा के सेवन से शरीर की पुष्टि होती है तथा बल और उत्साह की प्राप्ति होती है।
निद्राविषयक उपयोगी नियमः
रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे तक गहरी निद्रा लेने मात्र से आधे रोग ठीक हो जाते हैं। कहा भी हैः ‘अर्धरोगहरि निद्रा….‘
स्वस्थ रहने के लिए कम से कम छः घंटे और अधिक से अधिक साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए, इससे कम ज्यादा नहीं। वृद्ध को चार व श्रमिक को छः से साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए।
जब आप शयन करें तब कमरे की खिड़कियाँ खुली हों और रोशनी न हो।
रात्रि के प्रथम प्रहर में सो जाना और ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः 4 बजे नींद से उठ जाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है क्योंकि इस समय में ऋषि-मुनियों के जप-तप एवं शुभ संकल्पों का प्रभाव शांत वातावरण में व्याप्त रहता है। इस समय ध्यान-भजन करने से उनके शुभ संकल्पों का प्रभाव हमारे मनः शरीर में गहरा उतरता है। कम से कम सूर्योदय से पूर्व उठना ही चाहिए। सूर्योदय के बाद तक बिस्तर पर पड़े रहना अपने स्वास्थ्य की कब्र खोदना है।
नींद से उठते ही तुरंत बिस्तर का त्याग नहीं करना चाहिए। पहले दो-चार मिनट बिस्तर में ही बैठकर परमात्मा का ध्यान करना चाहिए कि ‘हे प्रभु ! आप ही सर्वनियंता हैं, आप की ही सत्ता से सब संचालित है। हे भगवान, इष्टदेव, गुरुदेव जो भी कह दो। मैं आज जो भी कार्य करूँगा परमात्मा सर्वव्याप्त हैं, इस भावना से सबका हित ध्यान में रखते हुए करूँगा।’ ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए।
निद्रानाश के कारणः
कुछ कारणों से हमें रात्रि में नींद नहीं आती अथवा कभी-कभी थोड़ी बहुत नींद आ भी गयी तो आँख तुरंत खुल जाती है। वात-पित्त की वृद्धि होने पर अथवा फेफड़े, सिर, जठर आदि शरीरांगों से कफ का अंश क्षीण होने के कारण वायु की वृद्धि होने पर अथवा अधिक परिश्रम के कारण थक जाने से अथवा क्रोध, शोक, भय से मन व्यथित होने पर नींद नहीं आती या कम आती है।
निद्रानाश के परिणामः
निद्रानाश से बदनदर्द, सिर में भारीपन, जड़ता, ग्लानि, भ्रम, अन्न का न पचना एवं वात जन्य रोग पैदा होते हैं
निद्रानाश से बचने के उपायः
तरबूज के बीज की गिरी और सफेद खसखस अलग-अलग पीसकर समभाग मिलाकर रख लें। यह औषधि 3 ग्राम प्रातः सायं लेने से रात में नींद अच्छी आती है और सिरदर्द ठीक होता है। आवश्यकतानुसार 1 से 3 सप्ताह तक लें।
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अच्छी नींद के लिए आयुर्वेद
पूरे दिन तरोताजा और उर्जा से भरपूर रहने के लिए जरूरी है कि आप रातभर अच्छी और सुकूनभरी नींद लें लेकिन चिंता, सोने का स्थान और परिस्थितियां आपकी नींद में बाधक हो सकती हैं।
योगा व ध्यान करें 
अगर कोई व्यक्ति नियमित रुप से योगा व ध्यान करता है तो उसे रात में नींद नहीं आने की समस्या होने की संभावना कम होती है। योगा आपके शरीर की थकान व तनाव को कम करता है जिससे आप अच्छी नींद ले सकते हैं।
चाय व कॉफी का परहेज जरूरी 
सोने से पहले या शाम के समय ज्यादा कॉफी या चाय नहीं पीएं क्योंकि चाय और कॉफी में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जिनसे उत्तेजना बढ़ती है और मस्तिष्क को जागृत कर देती है। ऐसे में नींद नहीं आने की समस्या हो सकती है।
  सोने का समय तय क रे 
अपने सोने व जागने का समय तय करें, इससे जब आपको आदत हो जाएगी तो अपने आप उस समय आपको नींद आने लगेगी। रात में ज्यादा देर तक नहीं जागें इससे नींद गायब हो जाती है इस कारण हानिकारक एडेरेनाइन हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। इसका नतीजा यह निकलता है कि आपको नींद ही नहीं आती है। तय समय पर खुद को सोने के लिए तैयार करें।
 टीवी से जरा दूरी भली
सोने से आधे घंटे पहले टीवी व कंप्यूटर के पास नहीं बैठे क्योंकि टीवी और कंप्यूटर की स्क्रीन से आने वाली रोशनी हमारे शरीर को ये एहसास दिलाती रहती है कि अभी दिन है। इस कारण हमारा शरीर सोने के लिए तैयार नहीं हो पाता। सोने से पहले आप किताबें पढ़ सकते हैं।
 म्‍यूजिक थेरेपी
संगीत में जादू होता है। ये मन की थकान को कम करता है, जिससे शरीर की थकान भी कम हो जाती है। सोने से पहले मधुर कीर्तन सुनें, नींद जल्दी आती है।
 पंजो की मसाज करें
खुद को अच्छी नींद के लिए पंजो का मसाज भी करें। दिनभर की थकान के बाद जब आपके पैरों में मसाज किया जाता है तो इससे आपको आराम मिलता है और नींद अच्छी आती है।
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आयुर्वेदिक ओषधे है घर का बना घी
ह्रदयरोग के साथ मोटापे और दिल के रोगियों का सबसे अधिक गुस्सा घी पर ही उतरता है। आयुर्वेद में घी को ओषधी माना गया है । इस सबसे प्राचीन सात्विक आहार से सर्वदेशों का निवारण होता है । वात और पित्त को शांत करने में सर्वश्रेष्ट है साथ ही कफ भी संतुलित होता है । इससे स्वस्थ वसा प्राप्त होती है , जो लीवर और रोग प्रतिरोधक प्रणाली को ठीक रखने के लिए जरूरी है । घर का बना हुआ घी बाजार के मिलावटी घी से कही बेहतार होता है । यह तो पूरा का पूरा सैचुरेटेड फैट है ,कहते हुए आप  इंकार में अपना सिर हिला रहे होगे । ज़रा धीरज रखे । घी में उतने अवगुण पाली अनासोचुरेतेड वसा को आग पर चढना अस्वास्थकर होता है ,क्योंकी ऐसा करने से पैराक्सैड्स और एनी फ्री रेडिकल्स निकलते है । इन पदार्थों की वजह से अनेक  बीमारिया और समस्याएँ पैदा होती है । इसका अर्थ यह भी है कि वनास्पतिजन्य सभी खाध्य तेल स्वास्थ केलिए कमोवेश हानिकारक  तो है ही।
फायदेमंद है घी
घी का मामला थोड़ा जुदा है। वो इसलिए कि घी का स्मोकिंग पाइंट दूसरी वसा ओं की तुलना में बहुत अधिक है । यही वजह है कि पकाते समय आसानी से नहीं जलता । घी में स्थिर सैचुरेटेड बाँडस बहुत अधिक होते है जिससे फ्री रेडीकल्स निकलने की आशंका बहुत कम होती है । घी की छोटी फैटी एसिड की चेन को शरीर बहुत जल्दी पचा लेता है । अब तक तो सभी यही समझा रहे थे कि देशी घी ही रोगों की सबसे बड़ी जड़ है ?
कोलेस्ट्राल कम होता है
घी पर हुए शोध बताते है कि इससे रक्त और आँतों में मोजूद कोलेस्ट्राल कम होता है । ऐसा इसलिए होता है , क्यों कि घी से बाइलारी लिपिड का स्राव बढ़ जाता है । घी नाही प्रणाली एवं मस्तिष्क की श्रेष्ट ओषधि माना गया है । इससे आँखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है , इसलिए ग्लूकोमा के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है । सकता है इस जानकारी ने आपको आश्चर्य में दाल दिया हो । घी पेट के एसिड्स के बहाव को बढाने में उत्प्रेरक का काम करता है जिससे पाचन क्रिया ठीक होती है । दूसरे अन्य वसा में यह गुण नहीं है । मक्खन , तेल आदि पाचन क्रिया को धीमा कर देते है और पेट में निष्क्रिय होकर बैठ जाते है । जाहिर है कि आप ऐसा नहीं चाहेगे । घी में भरपूर एंटी आक्सीडेट्स होते है तथा यह अन्य खाध्य पदार्थों से प्राप्त विटामिन और खनिजों को जज्ब करने में मदद करता है ।
यह शरीर के सभी ऊतकों की प्रत्येक सतह का पोषण करता है तथा रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूती प्रदान करता है । इसमें ब्यूटिरिक एसिड नामक फैटी एसिड भी भरपूर होता हैजिसे एंटीवायरल माना जाता है । एंटीवायरल विशेषता ओं के कारण कैसर की गठान की वृद्दि रूक जाती है । जलने के कारण हुए फफोलों पर घी बहुत अच्छा काम करता है । घी याददाश्त को बढाने और सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने में मदद करता है । ध्यान देने योग्य सलाह यह है की कोलेस्ट्राल की मात्रा कम हो लेकिन जिनका कोलेस्ट्राल पहले से ही बढ़ा हुआ है उन्हें घी से परहेज रखना चाहिए ।
घी खाएं या नहीं …
यदि आप स्वास्थ्य है, तो घी जरूर खाएं ,क्योंकी यह मक्खन से अधिक सुरक्षित है । इसमें तेल से अधिक पोषक तत्व है। आपने पंजाब और हरियाणा के निवासियों को देखा होगा । वे टनों घी खाते है ,लेकिन सबसे अधिक फिट और मेहनीत होते है ।यद्यपि घी पर अभी और शोधों के नतीजे आने शेष है , लेकिन प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में अल्सर , कब्ज , आँखों की बीमारियों के साथ त्वचा रोगों के इलाज के लिए घी का प्रयोग किया जाता है ।
क्या रखें सावधानियां ……
भैस के दूध के मुकाबले गाय के दूध में वसा की मात्रा कम होती है । इसलिए शुरू में निराश न हो । हमेशा इतना बनाएं की वह जल्दी ही ख़त्म हो जाए । अगले हफ्ते पुनः यही प्रक्रिया दोहराई जा सकती है । गाय के दूध में सामान्य दूध की ही तरह प्रदूषण का असर हो सकता है , मसलन कीटनाशक और कृत्रिम खाद के अंश चारे के साथ के पेट में जा सकते है । जैविक घी में इस तरह के प्रदूषण से बचने की कोशिश की जाती है । यदि संभव हो तो गाय के दूध में कीटनाशकों और रासायनिक खाद के अंश की जांच कराई जा सकती है । जिस तरह हर चीज की अति बुरी होती है इसी तरह घी का प्रयोग भी संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए ।
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तनाव को दूर करेगा ये मंत्र
ऊं को निराकार ब्रम्ह का स्वरूप माना गया है।ऊं की ध्वनि एक ऐसी ध्वनि है जिसकी गुंज को बहुत प्रभावशाली माना गया है। ऊं के उच्चारण के कई सारे फायदे हैं। ऊं की ध्वनि मानव शरीर के लिये प्रतिकुल डेसीबल की सभी ध्वनियों को वातावरण से निष्प्रभावी बना देती है।
- विभिन्न ग्रहों से आने वाली अत्यंत घातक अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रभाव ओम की ध्वनि की गुंज से समाप्त हो जाता है। मतलब बिना किसी विशेष उपाय के भी सिर्फ ओम् के जप से भी अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।- ऊँ का उच्चारण करने वाले के शरीर का विद्युत प्रवाह आदर्श स्तर पर पहुंच जाता है।
- इसके उच्चारण से इंसान को वाक्सिद्धि प्राप्त होती है।
- नींद गहरी आने लगती है। साथ ही अनिद्रा की बीमारी से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है।
-मन शांत होने के साथ ही दिमाग तनाव मुक्त हो जाता है।
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हेल्दी स्किन के लिए
यदि आपकी त्वचा तैलीय या सामान्य है , तो इस ठंडे मोसम का उस पर विशेष प्रभाव नहीं पडेगा , पर रूखी या शुष्क है , तो आपको इस मोसम में अतिरिक्त देख – रेख की जरूरत पड़ेगी ही । इस दिनों ठंडी हवाओं से त्वचा फट जाती है या शुष्क हो जाती है । सबसे ज्यादा चेहरे की त्वचा ही प्रभावित होती है । त्वचा की नमी बनाए रखना मुश्किल नहीं है । आप मोसम के अनुसार फेशियल करके इसे मोसम के कुप्रभावों से बच सकती है । इन दिनों फेशियल कैसे करें और किन चीजों का इस्तेमाल करें ,
चलिए जानते है …
सबसे पहले चेहरे की त्वचा को क्लींजिंग मिल्क से साफ करके पानी से धो लें । अब बराबर मात्रा में ग्लिसरीन और गुलाब जल मिलाकर उससे चेहरे की हल्की मालिश करें । गर्दन की हल्की मालिश पर हाथ थोड़े सख्ती से ऊपर की तरफ चलाएं । ठोडी की मालिश हाथों को बाहर ले जाते हुए करें ।
गालों पर गोलाई से मालिश करते हुए हाथ नीचे से ऊपर की और ले जाएं । इस प्रक्रिया से रक्त संचार बढेगा और गलों का गुलाबीपन  बना रहेगा । ललाट या माथे पर मालिश करते समय लेफ्ट से राइट की तरफ हाथों को थोड़ा टेढा करके चलाएं ।  आँखों की नजाकत का ध्यान रखते हुए उँगलियों को गोलाई  से इस तरह घुमाएं की ग्लिसरीन आँखों में न जाने पाएं , क्योंकी आँखों में यह जलन पैदा कर सकती है ।
ग्लिसरीन की मालिश होठों केलिए सर्दियों में जरूरी है । इससे सूखी त्वचा नाम हो जाती है और फेट होठों को राहत मिलती है । होठों की मालिश एक बार बाई और फिर एक बार दाई ओर से करें । नाक के लिए भी यह बेहतरीन मसाज है । इससे नाक की कठोर त्वचा भी मुलायम होकर चमकने लगेगी ।
सर्दियों में केवल यह मसाज दिन में समय मिलने पर दो – तीन बार आपने कर ली तो आपकी त्वचा की चमक देखने लायक होगी और इसका असर त्वचा पर स्थायी होगा ।
इन दिनों लगने वाले फेस पैक भी थोड़े अलग होते है । सबसे अच्छा पैक लाल चंदन के पाउडर का माना जाता है ।इसमें ताजी मलाई इतनी मात्रा में मिलाएं की गढ़ा पेस्ट बन जाए ।इस पेस्ट को नीचे से ऊपर की ओर गोलाई में हाथ चलाते हुए गर्दन और पूरे चेहरे पर लगाएं । पंद्रह – बीस मिनट बाद हल्के गरम पानी से धो लें । इससे त्वचा का रूखापन दूर हो जाएगा ।
शुष्क त्वचा होने पर बादाम के तेल में नींबू के रस की दो – तीन बूंद डालें और चंदन का पाउडर मिक्स करें । इसे चेहरे पर लगाएं । पांच – सात मिनट बाद हल्के हाथों से रगड़ते हुए उतार लें और हल्के गरम पानी से चेहरा धो लें । बादाम का तेल न हो तो मलायुक्त दूध भी काम में ले सकते है । इससे त्वचा की कोमलता बढ़ेगी और साथ ही सांवलापन भी ख़त्म होगा ।
त्वचा के तैलीय होने पर शहद में बेसन मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मलें और बाद में धो लें ।बेसन अतिरिक्त तेल को ख़त्म करेगा और शहद त्वचा के ढीलेपन को ख़त्म करके कसाव लाएगा । त्वचा की चमक भी शहद बनाए रखेगा ।
आप अधिक देर धूप में रहते है , तो रंगत पर असर होती ही है । ऐसी त्वचा पर कच्छा दूध और नीबू का रस रूई में लेकर धीरे – धीरे मलें । इससे त्वचा अपने असली रंग में आ आएगी । फिर पैक इस्तेमाल करें ।
समय न होने पर बादाम , जैतून , तिल या सरसों के तेल से मालिश करके हल्के गरम पानी में भिगोए निचुड़े तैलिए से त्वचा पर शुष्क हवावों का असर नहीं होगा और वह चिकनी व मुलायम बनी रहेगी ।
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मोटापा घटाने केलिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खेँ
मोटापे को लेकरकई लोग परेशानरहतें हैं और इससेछुटकारा पाना चाहतेंहैं ! कुछ उपाय ढूंढकर उनको प्रयोग में लातें हैं लेकिन कई बार ऐसा देखा गया हैकि हर उपाय हरआदमी के लिएफायदेमंदनहीं हो पाता हैजिसके कारणउनको निराश होनेकि आवश्यकतानहीं है औरउनको दुसरा उपायअपनाना चाहिए !आज में आपके सामनें मोटापे को दूर भगाने के लिए कुछ सामान्यआयुर्वेदिक नुस्खेँ लेकर आया हूँ! जिनका प्रयोग करके फायदा उठाया जा सकता है !
1. मूली के रस मेंथोडा नमक और निम्बूका रस मिलाकरनियमित रूप से पीने से मोटापा कमहो जाता है और शरीरसुडौल हो जाता है !
2. गेहूं, चावल, बाजराऔर साबुत मूंगको समान मात्रा मेंलेकर सेककरइसका दलियाबना लें !इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेदतिल 50 ग्रामभी मिला दें ! 50 ग्रामदलिये को 400मि.ली.पानी मेंपकाएं !स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें !नियमित रूप से एकमहीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनकलाभ होता है !
3. अश्वगंधा के एकपत्ते को हाथ सेमसलकर गोली बनाकर प्रतिदिनसुबह,दोपहर,शामको भोजन से एकघंटा पहलेया खाली पेट जल केसाथ निगल लें ! एकसप्ताह के नियमितसेवन के साथफल, सब्जियों, दूध, छाछ और जूस पर रहते हुए कईकिलो वजन कमकिया जा सकता है !
4. आहार में गेहूं केआटे और मैदा से बनेसभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें ! इसमें रोटी भीशामिल है !अपना पेट पहले के4-6 दिन तक केवलदाल, सब्जियां औरमौसमी फल खाकरही भरें ! दालों में आपसिर्फ छिलकेवाली मूंग कि दाल, अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडदकि दाल नहीं !सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं !गाजर, मूली, ककड़ी,पालक, पतागोभी, पके टमाटर औरहरी मिर्च लेकरसलाद बना लें ! सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च, सैंधा नमक, जीरा बुरककर औरनिम्बू निचोड़ करखाएं ! बस गेहूंकि बनी रोटी छोडकरदाल, सब्जी, सलाद और एक गिलास छाछका भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए ! इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं ! इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें !इसके बाद गेहूंकि बनी रोटी किजगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें !
5 किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें !6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में औरआधी मात्रा मेंदाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें ! एकमहीने बाद गेहूंकि रोटी खाना शुरूकर सकते हैं लेकिनशुरुआत एक रोटी सेकरते हुए धीरे धीरेबढाते जाएँ ! भादों केमहीने में छाछका प्रयोगनहीं किया जाता हैइसलिए इस महीनें मेंछाछ का प्रयोगनां करें !!
5. एरण्ड की जड़का काढ़ा बनाकरउसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमितसेवन करने सेमोटापा दूरहोता है !!
6. चित्रक कि जड़का चूर्ण एक ग्रामकी मात्रा में शहद केसाथ सुबह शामनियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है !!
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10 भयावह सच जो डॉक्टर मरीज को नहीं बताते. !
      
1. दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है अक्सर डायबिटीज शरीर में इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।
2. बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी के इलाज के लिए लगाई जाती है। परन्तु कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं तो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है जैसे कि फ्लू वायरस की वैक्सीन। बच्चों को दिए जाने वाली वैक्सीन डीटीएपी केवल बी.परट्यूसिस से लड़ने के लिए बनाई गई है जो कि बेहद ही मामूली बीमारी है। परन्तु डीटी एपी की वैक्सीन फेफड़ों के इंफेक्शन को आमंत्रित करती है जो दीर्घकाल में व्यक्ति की इम्यूनिटी पॉवर को कमजोर कर देती है।
3. कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता यूं तो कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री ए ंजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।
4. दवाईयां कैंसर पैदा करती हैं ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाईयों से कैन्सर होने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाईयां शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लॉकर्स की संख्या बढ़ा देता है जिससे शरीर में कोशिकाओं के मरने की दर बढ़ जाती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर कैंसर की गांठ बनाने में लग जाती हैं।
5. एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आ ंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले पेशेंट्स में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।
6. एक्स-रे से कैन्सर होता है आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
7. सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है। इनमें से एक सीने में जलन का होना भी है जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।
8. दवाईयों और लैब-टेस्ट से डॉक्टर्स कमाते हैं मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।
9. जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं है नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। जुकाम पर आपके दवाई लेने का कोई असर नहीं होता है, हां आपके शरीर को एंटीबॉयोटिक्स के साईड-इफेक्टस जरूर झेलने पड़ते हैं।
10. एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को नुकसान होता है मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स जैसे पैरासिटेमोल ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन तस्वीर के दूसरे पक्ष के रूप में एंटीबॉयोटिक्स व्यक्ति के लीवर को डेमेज करती है। यदि लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग कि या जाए तो व्यक्ति की किडनी तथा लीवर बुरी तरह से प्रभावित होते हैं और उनका ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
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गर्म पानी के फायदे
अगर आप स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं या ग्लोइंग स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स यूज करके थक चूके हैं तो रोजाना एक गिलास गर्म पानी पीना शुरू कर दें। आपकी स्किन प्रॉब्लम फ्री हो जाएगी व ग्लो करने लगेगी।
लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अगर पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है। दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है।
गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती है व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
भूख बढ़ाने में भी एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पीएं। इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा।
खाली पेट गर्म पानी पीने से मूत्र से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। दिल की जलन कम हो जाती है। वात से उत्पन्न रोगों में गर्म पानी अमृत समान फायदेमंद हैं।
गर्म पानी के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है। पसीने के माध्यम से शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं।
बुखार में प्यास लगने पर मरीज को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। गर्म पानी ही पीना चाहिए बुखार में गर्म पानी अधिक लाभदायक होता है।
यदि शरीर के किसी हिस्से में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है।
अधिकांश पेट की बीमारियां दूषित जल से होती हैं यदि पानी को गर्म कर फिर ठंडा कर पीया जाए तो जो पेट की कई अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी।
गर्म पानी पीना बहुत उपयोगी रहता है इससे शक्ति का संचार होता है। इससे कफ और सर्दी संबंधी रोग बहुत जल
Krantikari sant pu.shree parashmuni m.s.
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ज्‍यादा नींबू पानी पीने के साइड इफेक्‍ट ज्‍यादातर लोग सुबह उठते ही नींबू पानी का सेवन वजन कम करने या फिर शरीर को अंदर से साफ करने के लिये करते हैं। पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से शरीर को विटामिन सी, पोटैशियम और फाइबर प्राप्‍त होता है। हांलाकि इसका ज्‍यादा सेवन करने से कुछ साइड इफेक्‍ट भी हो सकते हैं। READ: नींबू पानी पीने का फायदा ज्‍यादा नींबू पानी पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और डीहाइड्रेशन की समस्‍या बढ़ जाती है। इसके अलावा कई लोगों को दांतों में ठंडा-गरम भी महसूस होने लगता है। READ: ज्‍यादा नींबू के सेवन से हो सकते हैं ये साइड इफेक्‍ट इसके अलावा ऐसी कई और समस्‍याएं हैं, जो कि ज्‍यादा नींबू पानी पीने से हो सकती हैं। नींबू पानी का नियमित सेवन करने पहले एक बार डॉक्‍टर की सलाह जरुर ले लें। आइये जानते हैं अधिक नींबू पानी के सेवन से क्‍या-क्‍या साइड इफेक्‍ट हो सकते हैं। 1.. गुर्दे और पित्ताशय की थैली की समस्‍या नींबू में एसिडिक लेवल के अलावा उसमें ऑक्‍सलेट भी होता है, जो कि ज्‍यादा सेवन से शरीर में जा कर क्रिस्‍टल बन सकता है। ये क्रिस्‍टलाइज्‍ड ऑक्‍सलेट, किडनी स्‍टोन और गॉलस्‍टोन का रूप ले सकता है।
2.. पेट हो सकता है खराब कई बार लोग खाना पचाने के लिये नींबू के रस का सेवन करते हैं क्‍योंकि इसका एसिड पाचन में मदद करता है। पर पेट में अधिक एसिड हो जाने की वजह से पेट खराब हो सकता है। नींबू को हमेशा खाने में मिला कर ही खाएं।
3. सीने में जलन अगर आपको एसिडिटी की समस्‍या है तो, नींबू का सेवन एक दम बंद कर दीजिये क्‍योंकि इसमें एसिड होता है।
4.. दांतों में ठंडा-गरम लगना नींबू में सिट्रस एसिड होता है, जिसका दांतों में ज्‍यादा संपर्क होने से दांत संवेदनशील हो जाते हैं। अगर आपको नींबू पानी पीना भी है तो उसे हमेशा स्‍ट्रॉ से पियें, जिससे पानी दांतों को न छुए।
5.. नींबू पानी को कभी भी किसी प्रकार की बीमारी को दूर करने के लिये नहीं पीना चाहिये। अगर आपको इसे पीने के बाद कोई साइड इफेक्‍ट लगे, तो इसका सेवन तुरंत ही बंद कर दें। अगर आपको इसे विटामिन सी प्राप्‍त करने के लिये पीना है, तो केवल आधा नींबू निचोड़ कर आधे गिलास पानी में मिक्‍स कर के पियें

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