Saturday, 24 June 2017

जोड़ों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी है रयूमेटायड अर्थराइटिस

जोड़ों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी है रयूमेटायड अर्थराइटिस


QUICK BITES:
  • यह बीमारी पूरे शरीर में फैलने वाली बीमारी है।
  • इसके प्रमुख कारणों का अभी तक पता नहीं चला।
  • मांसपेशियों और हड्डियां ज्‍यादा प्रभावित होती हैं।
  • ज्यादातर 20-50 साल के लोग होते हैं प्रभावित।
रयूमेटाइड आर्थराइटिस शरीर के जोड़ों को प्रभावित करती है। यह एक चिरकालिक दर्द देने वाली प्रक्रिया है जो दर्द, अकडन, गर्मी, लाली तथा जोड़ों की सूजन देती है। अर्थराइटिस के इस प्रकार में समय के साथ जोड़ों का आकार बदल जाता है। कई बार वे टेढ़े हो जाते हैं तथा उनकी क्षति भी हो सकती है। 

Rheumatoid Arthritisजोड़ों का स्तर बनाने वाले ऊतक मोटे हो जाते हैं और अपने आसपास के मांसपेशियों, हड्डियों को नुकसान पहुंचाते हैं। रयूमेटाइड आर्थराइटिस पूरे शरीर में फैलती है। यदि यह शरीर के एक हाथ में है तो यह दूसरे हिस्‍से को भी प्रभावित करती है। यदि यह घुटने में है तो दूसरा घुटना भी इसकी चपेट में आयेगा। आइए इसके बारे में हम आपको विस्‍तार से जानकारी देते हैं।

रयूमेटाइड आर्थराइटिस के कारण

अभी तक इसके प्रमुख कारणों का पता नहीं चल पाया है, इसलिए इसके कारण अभी तक अज्ञात हैं। पर यह खुद से होने होने वाली यानी स्वप्रतिरक्षित बिमारी लगती है। जब शरीर का प्रतिरक्षी तंत्र उस तरह से काम नहीं करता जिस तरह से उसे करना चाहिए तब यह बीमारी होती है। यानी जब श्वेत रक्‍त कणिकायें सामान्यत: जीवाणु और विषाणुओं का शिकार करती हैं तो वे स्वस्थ्य ऊतकों को अपना शिकार बनाती हैं। इस बिमारी में सिनोवियम या जोड़ ऊतक जब या सिनोवियल झिल्ली (ऊतक की पतली परत जो जोड़ों को ढके रहती है) में सूजन या ज्‍वलन होती है तो इसके कारण एन्जाइम निकलते हैं। समय के साथ यह एन्जाइम मांसपेशियों और हड्डियों को नुकसान पहुंचाते हैं।

क्‍या कहते हैं शोध

इस बीमारी पर कई शोध हो चुके हैं। कुछ शोध कहते हैं कि यह असामान्य प्रतिरक्षा प्रक्रिया एक विषाणु द्वारा की जाती है। पर अभी तक इस बारे में कोई भी पक्‍का सबूत नहीं मिला है जो सारे मरीजों में रयूमेटाइड आर्थराइटिस का प्रमुख कारण रहा हो। लेकिन इस मामले में यह भी लगता है कि कुछ लोग अपनी अनुवांशिकता के कारण इस बिमारी से ग्रसित हो जाते हैं। 

रयूमेटाइड आर्थराइटिस का असर

आर्थराइटिस सबसे ज्‍यादा जोड़ों को प्रभावित करता है। इसके कारण शरीर के जोड़ों वाले हिस्‍से सबसे ज्‍यादा प्रभावित होते हैं। हाथ, कुहनी,कलाई, कंधे, कुल्हे, घुटने, टखने और गर्दन आदि इसकी चपेट में आते हैं। रयूमेटाइड आर्थराइटिस कि वजह से जोड़ ढीले, असामान्य, कम गतिशील तथा कमजोर हो जाते हैं। इसमें मटर या मक्के के दाने बराबर गांठ भी बन जाती है जो कि दर्दहीन रहती है। यह ज्‍यादातर त्वचा के नीचे बनते हैं, ज्यादातर कुहनी के आसपास या फिर पैर की उंगलियों के आसपास। रयूमेटाइड आर्थराइटिस का दर्द मन्दा होता है, जैसे सिर दर्द या दांत का दर्द होता रहता निरंतर होता रहता है। यह दर्द सुबह के समय तेज हो सकता है। जो कि 30 मिनट से एक घंटा या इससे ज्यादा देर तक के लिए हो सकता है। दिन में जब यह बीमारी ज्यादा सक्रिय होती है तो थकान, भूख न लगना, मन्दा बुखार, पसीना और सोने में परेशानी जैसी समस्‍या भी हो सकती है।

रयूमेटाइड आर्थराइटिस पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली बीमारी है। इसकी वजह से शरीर के अंदरूनी हिस्‍से जैसे - दिल, आंख तथा फेफड़े भी प्रभावित होते हैं। इसके लक्षण अलग-अलग लोगों में और एक ही व्यक्ति में समय-समय पर बदलते रहते हैं। वे लोग जिनमें यह बिमारी कम गंभीर रूप में रहती है वे ज्यादातर दर्द और अकड़न से परेशान रहते हैं और उनमें जोड़ों ज्‍यादा नुकसान नहीं होता है।

कुछ लोगों में इसके कारण व्‍यक्ति को गंभीर समस्‍या हो सकती है। जिससे बचाव के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। रयूमेटाइड आर्थराइटिस से ग्रसित लोग बिमारी कि बिगड़ती तथा सुधरती हुई हालत देख सकते हैं जिसका कोई प्रमुख कारण नहीं होता है। यह बीमारी ज्यादातर 20 से 50 साल के लोगों को प्रभावित करती है। पर यह बच्चों और बूढ़ों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। एक अनुमान के मुताबिक यूनाइटेड स्टेट के दो लाख रयूमेटाइड आर्थराइटिस के मरीजों में से 75 प्रतिशत संख्‍या महिलाओं की है।

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